खरगोश पर निबंध – Essay on Rabbit in Hindi

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खरगोश एक बहुत ही शांत और चंचल जानवर है|  खरगोश स्तनपायी होते है| खरगोश के चार पैर होते है| खरगोश के कानो की लम्बाई अधिक बड़ी होती है| खरगोश की आँखें आकर में गोल रहती है| खरगोश बहुत ही चंचल होता है जिस वजह से वह इधर उधर फुदकता रहता है | खरगोश की छोटी सी पूँछ रहती है| खरगोश के दन्त लगातार बढ़ते है और सामने के दो दन्त बाकी सभी दांतों से बड़े होते है जो मुख से बहार निकले रहते है|

खरगोश पर निबंध - Essay on Rabbit in Hindi
खरगोश पर निबंध – Essay on Rabbit in Hindi

खरगोश की लम्बाई २०  इंच तक रहती है और औसत खरगोशों का वजन २-२.५ किलो रहता है। खरगोश एक  शाकाहारी जीव है। गर्मी के महीनों के दौरान, खरगोश जादातर जड़ी बूटी, मटर, घास, तिपतिया घास, सलाद और साग इत्यादि खाना बहुत पसंद करते है और वहीँ सर्दियों के महीनों में, खरगोश टहनियाँ, छाल और कलियों खाते है | खरगोशो का प्रिय भोजन “गाजर” हम सभी जानते है, वह गाजर खाना बहुत पसंद करते है| खरगोश जादातर बिल में रहते हैं, उन्हें साफ़ जगह बेहद पसंद रहती है| खरगोश बहुत दूर तक कूद सकता है। खरगोश विभिन्न प्रकार की ध्वनियाँ बना सकता है। खरगोश बहुत सामाजिक, प्यार करने वाले और मनुष्यों से जुड़े हुए जीव हैं| खरगोश बड़े समूहों में रहते हैं जिन्हें कॉलोनियों या झुंड कहा जाता है। खरगोश के पालने घर को बाड़ा कहा जाता है|

मेरा प्रिय पशु खरगोश पर निबंध – Essay on Rabbit in Hindi

खरगोश की सबसे छोटी नस्ल नीदरलैंड में है जिन्हे “ड्वार्फ खरगोश” कहा जाता है, जिसका वजन सिर्फ १ किलोग्राम है और वहीँ खरगोश की सबसे बड़ी नस्ल “फ्लेमिश” विशालकाय खरगोश है जिसका वजन लगभग ८ किलोग्राम है जो की औसत बिल्ली के आकार से दोगुना बड़ा है|  दोनों नर और मादा खरगोश का आकर एक बराबर रहता है|

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खरगोश के परिवार की ५० से अधिक प्रजातियां हैं। खरगोश की प्रजातियां जिन्हें आमतौर पर पालतू जानवर के रूप में रखा जाता है, जिससे अंग्रेजी में “ओरीक्टोलेगस सिनक्यूल”‘ कहा जाता है और इस प्रजाति के भीतर चुनिंदा प्रजनन के माध्यम से विभिन्न नस्ल विकसित होती है|

खरगोश कई रंगों में पाया जाता है जैसे सफ़ेद, काले, भूरे प्रमुख रंग होते हैं। खरगोश अपने आप को गीला होने से बचते है क्योंकी उनके शरीर के केश गीले होने से झड़ने लगते है| खरगोश के बाल काफी नरम तथा मुलायम होते है| खरगोश दौड़ने में सबसे आगे रहता है, इसी के मिलते झूलते उद्धरण के रूप में हम सभी ने पंचतंत्र की  कछुए और खरगोश की दौड़ प्रतियोगिता के बारे में ज़रूर पढ़ा और सुना है|

यह दोनों जानवर घड़ी के २ कांटे को दर्शाता है जिसमे कछुए के छोटा कांटा और खरगोश को बड़ा कांटा कहा जाता है, जिसमे खरगोश तेज़्ज़ दौड़ते  हुए भी अंत में कछुए से हार जाता है, इस  घमंड में की कछुआ अभी बहुत पीछे है में अभी सो जाता हूँ, जिसके चलते कछुआ आगे निकल जाता है और तेज़्ज़ भागने वाले खरगोश को हरा के प्रतियोगिता जीत जाता है|

खरगोश की औसत आयु ८ से १० साल होती है|

खरगोश शिकार किये जाने वाला जानवर हैं। वे खुले स्थानों में सावधानी से रहते हैं और यदि उन्हें कभी भी खतरा महसूस होता है, तो वे एक दम स्थिर होक रुक के देखते हैं। उनकी दृष्टि बहुत ही विस्तृत होती है, जिससे वह पीछे का दृश्य आसानी से देख लेते है| कई जानवर जैसे लोमड़ी, कुत्ते, भालू, रैकोन, मिंक, वीसल्स और सांप जैसे जानवर खरगोश के दुश्मन होते है।

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शिकारी पक्षी कभी-कभी खरगोश का शिकार करते हुए उससे उठा के ले जाते हैं। आदमी भी खरगोशों को मारने के लिए भी जाना जाता हैं क्योंकि वे फसल खाते हैं। खरगोश के सुनने की क्षमता बहुत तेज़्ज़ होती है, जिससे वह अपने आस पास के वातावरण में हो रही हल चल हो बहुत जल्द परख लेते है और खुद को सावधान कर देते है अपनी सुरक्षा के लिए उनके बचने का सबसे सुरक्षित उपाय ये रहता है की वह अपने बिल में चले जाये|

एक खरगोश की देख रेख उनके स्वास्थ्य और भलाई के लिए आवश्यक है। सप्ताह में एक बार खरगोश को  तैयार करना महत्वपूर्ण है क्योंकि वे खुद को जुनूनी रूप से तैयार करते रहते है हैं, लेकिन यह उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो जाता है क्यों की वे अपने जड़ते बालों को निगल लेते हैं।

खरगोशों को खिलाना बहुत ही आसान है क्यों की वह पालतू जानवर हैं। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि उन्हें दैनिक आधार पर ताजा घास और अनाज खिलाना चाहिए| पालतू खरगोशो को संतुलित आहार और पाचन के लिए प्रतिदिन ताजा अच्छी तरह से धुली सब्जियों के साथ एक गाजर खिलाना चाहिए| फलों को नाश्ते के रूप में हर बार खरगोशों को दिया जा सकता है|

विश्व के आधे से ज़ादा खरगोश उत्तर अमेरिका में पाए जाते है| मादा खरगोश एक बार में ४ से १२ बच्चे जन्म दे सकती है|

नवजात खरगोश फर के साथ पैदा होते हैं और जन्म के तुरंत बाद देखने में सक्षम होते हैं। खरगोश बहुत ही प्राचीन जीव है,क्यों की वैदिक काल में भी खरगोश पाए जाते थे| खरगोश प्रति दिन ८ से ९ घंटे सोते है, कभी कभी डर की वजह से की कोई उनका शक्कर न करले इसलिए वह आँखें खोल के भी सोते है ताकि खतरा होने पर अपना बचाव कर सकेखरगोश अपना घर खुदा बना लेते है|

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खरगोश एक तरह से खुदाई करने वाली मशीनें हैं। न केवल उनके पास बहुत मजबूत, तेज नाखून हैं, बल्कि बेहद कुशल सामने के पंजे भी हैं जो उन्हें लंबे समय तक मिटटी को खरोचने में मदत करते है खरगोशो को खुदाई करना पसंद है, और यह वही है जो वे करने के लिए विकसित हुए हैं। अधिकांश जंगली खरगोशों को लोमड़ियों और भेड़ियों जैसे शिकारियों से छिपाने के लिए एक  “वारेन” की आवश्यकता होती है। खरगोश अपने बिल में कई अलग- अलग रास्ते बनाते है| खरगोश इन संरचनाओं को खोदने और बनाए रखने में काफी समय खर्च करते हैं।

खरगोश आपने में वार्तालाप कई तरीको से करते है, चाहे वह मनुष्यो के साथ हो या अपनी प्रजाति के सदस्य के साथ। खरगोश शरीर की भाषा, कुछ ध्वनियों और इशारो से बातें करते है| खरगोश लगाकर गुर्राते हुए भी बात चीत करते है जैसे की कुत्ते और बिल्ली करते है| खरगोश चूँ-चूँ करके और दांतो से किट-किट करके भी बात करते है| खरगोश एक बहुत ही मासूम और बिलकुल भी हानिकारक जीव नहीं होते है हमे इनका संरक्षण करना चाहिए|

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