वन्दे मातरम्” किसने और कब लिखा था? | Who wrote Vande Mataram and when?

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हेलो दोस्तों आज हम वन्दे मातरम् राष्ट्रीय गीत किसने लिखा था के बारे में जानते हैं यह एक G.K. का बहुत ही महत्वपूर्ण का सवाल है|

वन्दे मातरम् राष्ट्रीय गीत किसने लिखा था?: बंकिमचंद्र चटर्जी

वन्दे मातरम् kisne likha tha
वन्दे मातरम्

वन्दे मातरम् गीत की रचना बंकिमचंद्र चटर्जी जी द्वारा की गई है। बंकिमचंद्र चटर्जी को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय भी कहा जाता है। बंकिमचंद्र चटर्जी ने वन्दे मातरम् गीत की रचना 7 नवंबर 1876 को की थी। ऐसा कहा जाता है कि यह गीत इन्होंने सियालदाह से नौहाटी आते वक्त ट्रेन में ही लिखा था। वन्दे मातरम् गीत में भारत माता की स्तुति की गई है और बाद के बांग्ला पदों में भारत माता की दुर्गा मां के रूप में स्तुति की गई है।

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संस्कृत बांग्ला भाषा में लिखित मिश्रित गीत वन्दे मातरम् का प्रकाशन 1882 में इनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में अंतर्निहित गीत के रूप में हुआ था।वन्दे मातरम् गीत के पहले दो पद संस्कृत में है और बाकी के पद बांग्ला में है।आनंदमठ में यह गीत भवानंद नाम के सन्यासी विद्रोही द्वारा गाया गया है। इस गीत की धुन यदुनाथ भट्टाचार्य जी द्वारा बनाई गई है, जिसको गाने में 65 सेकंड का समय लगता है। 

 1870 की बात है जब अंग्रेजों ने ‘गॉड सेव द क्वीन’ गीत को गाया जाना अनिवार्य कर दिया था।बंकिमचंद्र चटर्जी जो उस समय एक सरकारी अधिकारी थे, उन्हें इस बात से बहुत ठेस पहुंची थी।तब उन्होंने 1876 में इस गीत की रचना की थी। रवीन्द्रनाथ टैगोर जी द्वारा इस गीत को स्वरबद्ध किया गया और पहली बार 1896 को कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में यह गीत गाया गया। इस गीत का आरिफ मोहम्मद खान जी ने उर्दू में और अरबिंदो घोष जी ने अंग्रेजी में अनुवाद किया।

आनंदमठ उपन्यास जमीदारों और अंग्रेजों के शोषण और प्राकृतिक प्रकोप जैसे अकाल से मर रही जनता को जागृत करने के लिए अचानक से ही उठ खड़े हुए ‘सन्यासी विद्रोह’ पर आधारित था। इन सभी ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख बंकिमचंद्र चटर्जी ने आनंदमठ के तीसरे संस्करण में किया है और यह सभी तथ्य इन्होंने ग्लेग और हण्टर जैसे विद्वानों की पुस्तकों से लिए हुए है।

 बंगाल में चले स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विभिन्न रैलियों में जोश भरने हेतु यह गीत गाया जाने लगा। धीरे-धीरे यह गीत लोगों में इतना अधिक लोकप्रिय हो गया कि अंग्रेजों को इस गीत की लोकप्रियता और जन-जन में इस गीत द्वारा भरते जोश से डर लगने लगा। तब उन्होंने इस गीत को प्रतिबंधित करने का विचार किया।

1901यानी पूरे 5 साल बाद कोलकाता में हुए एक अन्य अधिवेशन में श्री चरणदास जी द्वारा यह गीत गाया गया। 1905 के बनारस अधिवेशन में इस गीत को सरलादेवी चौधरानी ने स्वर दिया। राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के बराबर ही राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् गीत को स्थान प्राप्त है।यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के समय सभी देशवासियों के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत बना।

बंग-बंग आंदोलन के दौरान वन्दे मातरम् एक राष्ट्रीय नारा बना। लाला लाजपत राय ने लाहौर से जिस जर्नल के प्रकाशन का कार्य आरम्भ किया उसका नाम उन्होंने वन्दे मातरम् ही रखा। अंग्रेजों की गोली का शिकार बनी आजादी की दीवानी मातंगी हजारा की जुबान से आखिरी शब्द वन्दे मातरम् ही निकला।1906 में वन्दे मातरम् को देवनागरी लिपि के संशोधित रूप में  कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रविन्द्रनाथ टैगोर जी द्वारा प्रस्तुत किया गया। 1907 में मैडम भीकाजी कामा द्वारा जर्मनी के स्टुटगार्ट में जो तिरंगा फहराया गया था उसके मध्य में वन्दे मातरम् ही लिखा हुआ था।

1929 में आर्य प्रिंटिंग प्रेस लाहौर तथा भारतीय प्रिंटिंग प्रेस देहरादून द्वारा प्रकाशित काकोरी के शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित पुस्तक ‘क्रान्ति गीतांजलि ‘में पहला गीत मातृ वंदना के रूप वन्दे मातरम् गीत के शुरुआती दो पद है। बाद में इसका पुनः संपादन हुआ जो अब पुस्तकालय में उपलब्ध है।

 1923 में कांग्रेस अधिवेशन में वन्दे मातरम् गीत में मूर्ति पूजा का विरोध उठा।जिस कारण पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सुभाष चंद्र बोस और आचार्य नरेंद्र देव कि समिति ने 28 अक्टूबर 1937 को गीत के गायन को अनिवार्यता के बन्धन से मुक्त किया। इस गीत के उन अंशो को छांट दिया गया जो बुतपरस्ती के भाव को ज्यादा प्रबल बनाते थे और गीत के संपादित भाग को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा प्राप्त हुआ।

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आजादी की सुहानी सुबह 15 अगस्त 1947 को प्रातः 6:30 बजे आकाशवाणी से पंडित ओमकारनाथ ठाकुर जी ने पूरा गीत को राष्ट्रगीत की तरह पूरा सम्मान देते हुए, खड़े होकर गया था। जिसके प्रसारण का पूरा श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल जी को जाता है। जिसकी रिकॉर्डिंग ‘दी ग्रामोफोन कंपनी ऑफ इंडिया’ की रिकॉर्ड संख्या STC 0487102 में आज भी मौजूद है।

अंतर्राष्ट्रीय सर्वेक्षण में बीबीसी वर्ल्ड सर्विस द्वारा 2003 में 7000 गीतों में से सबसे मशहूर 10 गीतों का चयन होना था।जिसके लिए 155 देशों/द्वीपों के लोगों ने मतदान किया था, जिसमें वन्दे मातरम् गीत को शीर्ष से दूसरा स्थान प्राप्त हुआ था।
 15 सितंबर 1959 को जब दूरदर्शन चैनल की शुरुआत हुई थी तो सुबह-सुबह वन्दे मातरम् गीत ही प्रसारित हुआ करता था। यह राष्ट्रगीत विभिन्न शिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों में जन-जन में एक चेतना भरने के लिए आज भी सम्मान से गाया जाता है।

वन्दे मातरम् राष्ट्रीय गीत

वन्दे मातरम्!
सुजलां सुफलां मलयजशीतलां
शस्यश्यामलां मातरम्!
शुभ-ज्योत्सना-पुलकित-यामिनीम्
फुल्ल-कुसुमित-द्रमुदल शोभिनीम्
सुहासिनी सुमधुर भाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम्!
सन्तकोटिकंठ-कलकल-निनादकराले
द्विसप्तकोटि भुजैर्धृतखरकरबाले
अबला केनो माँ एतो बले।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं
रिपुदल वारिणीं मातरम्!

तुमि विद्या तुमि धर्म
तुमि हरि तुमि कर्म
त्वम् हि प्राणाः शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति
हृदये तुमि मा भक्ति
तोमारइ प्रतिमा गड़ि मंदिरें-मंदिरे।

त्वं हि दूर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमल-दल विहारिणी
वाणी विद्यादायिनी नवामि त्वां
नवामि कमलाम् अमलां अतुलाम्
सुजलां सुफलां मातरम्!
वन्दे मातरम्!

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम
धमरणीं भरणीम् मातरम्।

 भारत माता की जय||

दोस्तों उम्मीद है वन्दे मातरम्” किसने लिखा था (Who wrote the national song Vande Mataram) इसका उत्तर आपको मिल गया होगा और यह आपकी नॉलेज बढ़ाने में भी मदद करेगा।

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