चाचा को धन्यवाद पत्र | Chacha Ko Dhanyawad Patra

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चाचा जी को धन्यवाद पत्रचाचा जी को धन्यवाद पत्र in Hindi

10/12 करोल बाग,
विजय नगर,दिल्ली
नवंबर 10, 2018

आदरणीय चाचा जी,

सादर चरण स्पर्श। मैं यहां कुशल मंगल हूं और आशा करती हूं आप और आपके परिवार भी कुशल मंगल
होंगे। कल आपका मनी आर्डर मिला जिसके वजह से आज मैंने इंजीनियरिंग का फॉर्म भर पायी हूँ। आपको बहुत बहुत धन्यवाद चाचाजी। पता नहीं आप नहीं होते तो हम दोनों बहने कैसे अपनी पढ़ाई करते। आपने हमे कदम कदम पर सहारा दिया है।

मुझे आज भी वो दिन याद है जब सब दीदी की पढ़ाई के खिलाफ थे। आप ही तो जो उसके साथ थे और उसे पढ़ाई के लिए पैसे भेजते थे। अगर आपका सपोर्ट नहीं होता तो शायद आज उसकी शादी हो जाती और वो पढाई भी पूरी नहीं कर पाती। वो जिस पद पर आज नौकरी कर रही है वो सिर्फ और सिर्फ आपकी वजह से आपके सपोर्ट और विश्वास की वजह से।

आपने हमारा हमेशा ख्याल रखा है। हर तकलीफ में हमने आपको समीप पाया है और हमारा
साथ देने में आपने कभी भी कतराए नहीं है। चाचाजी आपकी इस निःस्वार्थ भाव की हम बहुत क़द्र करते है और
आपका आदर करते है। मुझे आज भी वो दिन याद है जब पिताजी की तबियत बहुत खराब हो गयी थी आपने अपनी
नौकरी चोर कर उनका ख्याल एक माँ की तरह रखा था।

इतना तो कोई भी नई करता जितना अपने हमारे परिवार के लिए किया है। न जाने हमने कोण से पुण्य किये थे की हमें आपके जैसा चाचा मिला है। बचपन से लेकर आज तकहमने जो भी फरमाइश की है सब आपने पूरा किया है। हमे आपने अपने पिताजी से ज़्यादा ही लाड प्यार दिया है। जबहमें कुछ भी चाहिए था हम पिताजी के पास न जा कर आपके पास जाते थे क्योंकि हमें भी पता था कि सिर्फ आप ही है जो हमारी पुकार सुनते थे।

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बचपन से आपने ही हमें उतीर्ण शिक्षा दी और अच्छे व्यवहार के लिए प्रेरित किया। कभी भी जब हम लड़ाई करते थे तो आप हमें समझते थे और प्रेमभाव से रहने के लिए कहते थे। आपने हमें निडर होकर ज़िन्दगी जीना सिखाया है। तथा हमें सचाई के पथ पर चलने के लिए प्रेरित किया है। सच तो यह है कि आज जो भी अच्छाईयां है हममे उसका श्रेय आपको ही जाता है। मुझे कभी भी पढ़ना पसंद नहीं था पर अपने ही हमेशा मुझे पढ़ने की आदत लगा दी वो भी ऐसी आदत लगाई की मैं हमेशा क्लास में फर्स्ट आने लगी।

बचपन से ही आप मेरे और मेरे भी के लिए एक उदाहरण बनेगी हमें बड़े होकर ऐसे ही बनना है दूसरों की मदद करने वाला दूसरों के दुख में दुख बांटने वाला दूसरों के दुख में खड़े रहने वाला और अगर कुछ भी मदद ना हो तो अपने शब्दों से सहानुभूति देने वाला।

आपको शायद पता नहीं पर दीदी के मन में हमेशा से आप एक भगवान की तरह हो उसे यह लगता है कि अगर आज आप नहीं होते तो पता नहीं उसकी शादी कब की तय हो चुकी होती और उसका सपना आगे पढ़ने का नौकरी करने का अधूरा ही रह जाता यहां तक कि उसने अपने सारे दोस्तों को आपके बारे में बताया है कि आपने हमारे परिवार और उसके लिए कितना किया है और उसके जीवन में आप कितना महत्व रखते हैं।

दीदी तो यहां तक भी सोचती है कि उसके पूर्व जन्म के पुण्य होंगे जिसके वजह से उसके जिंदगी में आपके जैसा चाचा मिला जिसने हर मुकाम पर हर मोड़ पर हर ठोकर पर उसका साथ दिया उसे अपने बड़े भाई की बच्ची ना समझ कर खुद की बेटी मानकर उसे पढ़ाया लिखाया अपने पैरों पर खड़ा कराया। जब सब ने साथ छोड़ दिया था तब वह आप ही थे जिसने लड़कों वालों को मना कर के बेज्जती सके दीदी को पढ़ने के लिए भेजा।सिर्फ दीदी को ही नहीं आपने मुझे भीहर मोड़ पर साथ दिया हर छोटी से छोटी बात समझाई बताएं |

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जिंदगी में आगे बढ़ने की शिक्षा दी। हमें अपने तमीज सिखाई अपने पैरों पर खड़े रहने की रीत सिखाई किसी के सामने ना झुकने की बात बताई और अपने लिए खड़े रहने का वजह बताया। आपने हमेशा हमें एक पिता के रूप में प्यार और आदर दिया यहां तक कि भी पिताजी भी आपको बहुत स्नेह देते हैं और कभी भी आपकी बात को किसी भी बात को गलत नहीं बताया यहां तक की उन्होंने आपके लक्ष्य कदम पर हमें चलने को कहा ।

वहजब भी हमसे हमारे भविष्य के बारे में बात करते हैं उसमें आपका जिक्र होता है और पिताजी यही कहते हैं कि कितने भी बड़े आदमी क्यों ना बन जाओ कभी भी घमंडी ना होना हमेशा अपने चाचा के तरफ झुके हुए रहना आज इतने बड़े पद पर होने के बावजूद तुम्हारे चाचा कभी किसी से घमंड में रहकर बात नहीं करते हमेशा बड़ों की आदर करते हैं छोटों को सम्मान देते हैं और मुसीबत के समय सबके लिए खड़े रहते हैं। अगर तुम्हें कभी इज्जत बटोरी नहीं हो तो अपने चाचा से सीखो उनसे सीखो कि कैसे बड़ों का सम्मान करके खुद का सम्मान खुद की इज्जत बढ़ाई जाती है उससे सीखो की बच्चों से प्यार से बात करके उन्हें जटिल से जटिल काम आसान बनाना कैसे सिखाया जाता है।

खून से सीखो कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता है रिश्ता नाता भी कोई चीज होती है जो रिश्ता नाता कदम कदम पर साथ
निभाती है तुम्हारे चाचा एक इंसान नहीं वह मूरत है जिसमें सच्चाई है कर्तव्य को पालन करने कीचाहत है अपनों के लिए कुछ भी कर जाने का साहस है । अगर मैं संक्षेप कहूं तो पिताजी ने आपकोभगवान बताया सिर्फ पिताजी ही नहीं हम सब आपको बहुत सम्मान करते हैं और मैं तो आपको पिताजी से बढ़कर मानती हूं अगर आप नहीं होते तो शायद मेरी पढ़ाई भी अधूरी रह जाती।

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अब मेने भी बीटेक की तैयारियाँ क्र ली है और जल्द ही किसी अच्छे से कॉलेज में अपना नाम दाखिला करवा लुंगी। ये भी मुमकिन बस आपके कारन ही हो पाया है अगर आप आज न होते तो में फॉर्म नहीं भर पाती और इस साल मेरा एडमिशन कही नहीं हो पाता। मैं आपको इस चीज़ के लिए जितना भी धन्यवाद दूँ काम ही है। अब कुछ और नहीं बस में आपका
आशीर्वाद चाहती हूँ ताकि मैं अपने ज़िन्दगी की हर मुश्किलों को आसानी से पार कर लूं। मैंऔर मेरा पूरा परिवार हमेशा आपका आभारी रहेगा।

आपकी भतीजी,
तृषा

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