दिवाली पर निबंध (Diwali Essay in Hindi) – दीपावली का निबंध हिंदी में

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 दीपावली का त्यौहार निबंध (दिवाली पर निबंध (Diwali Essay in Hindi) – दीपावली का निबंध हिंदी में )

दोस्तों आज हम दिवाली पर निबंध (Diwali Essay in Hindi) – दीपावली का निबंध हिंदी में के बारे में पढ़ेंगे, दिवाली हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है जो कि पुरे भारतवर्ष में बहुत ही उल्लास के साथ मनाया जाता है|

दिवाली पर निबंध Diwali Essay in Hindi दीपावली का निबंध हिंदी में

भारत त्योहारों का देश है यहां पर हर दिन एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है जिसमें से प्रमुख त्योहार होली, दीपावली, रक्षाबंधन, नवरात्र आदि और भी प्रमुख त्योहार है परंतु दिपावली एक ऐसा त्यौहार है। जो भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है जैसा की नाम से स्पष्ट है दीपावली अर्थात दीपों का त्योहार अर्थात रोशनी का त्योहार। दीपावली का त्यौहार हिंदू मान्यता के अनुसार शरद ऋतु में मनाया जाता है|

हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या को  दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है। भारत में ये त्योहार हर वर्ष मनाया जाता है। दीपावली का त्यौहार हिंदुओं के सबसे प्रमुख त्योहारों में शामिल है। यह त्यौहार बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

दीपावली का त्यौहार सामाजिक तथा धार्मिक दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे दीपों का उत्सव अर्थात दीपोत्सव भी कहा जाता है। हमारे उपनिषदों में कहा गया है ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ जिसका मतलब है ‘अंधेरे से ज्योति की ओर अर्थात ज्योति की तरफ बढ़ना चाहिए’ मतलब हमें अपनी बुरी आदतों को छोड़कर अच्छी आदतों की ओर अग्रसर होना चाहिए तथा हमें अच्छी आदतों को अपनाना भी चाहिए।

दीपावली का महत्व

दादी-नानीयों से सुनी गई कथाएं:- दिवाली के संबंध में बहुत सी कथाएं प्रचलित हैं जिसमें से सबसे मुख्य कथा श्री रामचंद्र जी के वापस अयोध्या लौटने की है ऐसा माना जाता है कि दीपावली के पर्व पर श्री रामचंद्र भगवान अपना 14 वर्ष का वनवास काटने के पश्चात अयोध्या अपनी नगरी एक राजा के रूप में लौट रहे थे।

अयोध्या की प्रजा ने जब यह देखा कि उनके प्रिय राजा श्री रामचंद्र वापस अयोध्या आ रहे हैं तब उन सभी का मन हर्ष और उल्लास से भर गया तथा अपने प्रिय राजा के वापस उनके राज्य में लौटने की खुशी में तथा उनके स्वागत के लिए अयोध्या वासियों ने घी के दीपक जलाए उस दिन कार्तिक मास की काली अमावस्या की रात थी परंतु दीपक जलाने के पश्चात अयोध्या जगमगा उठा था। तभी से भारत में हर वर्ष यह त्यौहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है|

अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार दीपावली का त्यौहार अक्टूबर या नवंबर के माह में आता है। दिवाली स्वच्छता तथा प्रकाश का त्यौहार है। कई सप्ताह पूर्व दीपावली के त्यौहार की तैयारियां आरंभ हो जाती है। दीपावली के त्यौहार आने से पहले ही सभी अपने अपने घर तथा दुकानों की मरम्मत कराते है तथा मरम्मत के पश्चात यथा संभव रंग रोगन का कार्य करने के पश्चात घरों की सफाई करते हैं। दीपावली के त्यौहार आते ही सभी घर, बाजार, मोहल्ले तथा सभी दुकाने बहुत साफ-सुथरी दिखने लगती हैं।

दीपावली का त्यौहार प्राचीन समय के हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास में गर्मी की फसल की कटाई के बाद एक त्योहार के रूप में मनाया जाता है। दिवाली का उल्लेख स्कंद पुराण में मिलता है जिसमें सूर्य के हिस्से का प्रतिनिधित्व दीपक अर्थात दिया करते हैं।

सूर्य जो की ऊर्जा और प्रकाश देता है तथा सूर्य हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास में अपनी स्थिति कुछ रूप से बदलता है सूर्य को हिंदी रीति-रिवाजों में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। कुछ जगहों पर यमराज तथा नचिकेता की भी कहानी दीपावली के संबंध में प्रचलित है। जो सही-गलत, ज्ञान-अज्ञान, अच्छा-बुरा, सच्चा धन-क्षणिक धन आदि के बारे में ज्ञान देता है।

सातवीं शताब्दी में राजा हर्ष ने इस त्यौहार को ‘दीपप्रतिपादुत्सव‘ कहा है जिसमें नए दूल्हा तथा दुल्हन के जोड़ों को तोहफे दिये जाते हैं तथा दिए जलाए जाते हैं। 9 वीं शताब्दी में राजशेखर ने इसे ‘दीपमालिक‘ कहां है जिसमें घरों की सफाई करके दीपक से घर, बाजार तथा दुकानों को सजाया जाता है। प्रसिद्ध इतिहासकार अल बेरुनी ने कहा है कि ‘दिवाली का त्योहार भारत में कार्तिक माह में नए चंद्रमा के दिन पर हिंदुओं के द्वारा मनाया जाता है‘।

दिपावली के दिन भारत के साथ-साथ अन्य देशों में भी छुट्टियाँ मनायी जाती है जैसे:- नेपाल। क्योंकि नेपाल में दिपावली के पर्व से ही नये वर्ष का आरम्भ होता है तथा जैसा की हम जानते है कि भारत में दिपावली एक महत्त्वपर्ण त्यौहार के रुप में मनाया जाता है। भारत में शॉपिंगो के सीजन में दिपावली का सीजन सबसे बड़ा सीजन होता है। दिपावली के त्योहार में सबसे भारी मात्रा में गाड़ीयाँ, सोना, आभूषण और अन्य महँगे सानो की बिक्री होती है।

लोग अपने तथा परिवार के लोगों के लिए कपड़े तथा मिठाइयां भी खरीदते हैं और रसोई के बर्तन इस त्यौहार में खरीदना मुख्य माना जाता है तथा शुभ भी माना जाता है। लोग अपने दोस्तों तथा परिवार के सदस्यों को उपहार भी देते हैं उस उपहार में मिठाई अथवा मेवे अथवा अन्य प्रकार की वस्तुएं भी होती हैं।

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घर के बुजुर्ग लोग छोटे बच्चों को दिवाली के महत्व के बारे में तथा इस त्यौहार की प्रचलित कथाएं सुनाते हैं घर की महिलाएं घर के दरवाजों के पास भिन्न-भिन्न आकृतियों की रंगोलियां बनाती है तथा वयस्क तथा युवा आतिशबाजी तथा प्रकाश की व्यवस्था करते हैं।

दिपावली के दिन धन तथा  समृद्धि की देवी लक्ष्मी तथा अन्य देवाओं की भी स्तूति की जाती है। दिवाली की रात में आतिशबाजी से आसमान रौशन हो जाते है, फिर रात में घर में बने पकवानो आदि का लुफ्त उठाते है।

दीपावली का धार्मिक महत्त्व:-

रामायण जो की हिंदुओं का प्राचीन ग्रंथ है उसमें लिखा है कि दिवाली पर श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी अपने 14 साल का बनवास पूर्ण करके अयोध्या आने की खुशी में तथा सम्मान के रूप में मनाएं दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है।

महाकाव्य भारत महाभारत के अनुसार दीपावली को 12 वर्षों के वनवास पर 1 वर्ष के अज्ञातवास के बाद पांडवों की खुशी तथा सम्मान प्रतीक रूप में मनाया जाता है। कई लोग दीपावली को भगवान विष्णु की पत्नी माता लक्ष्मी जो की धन तथा समृद्धि की देवी है उनसे जुड़ा मानते हैं।

ऐसा माना जाता है कि राक्षसों तथा देवताओं के बीच लौकिक सागर में समुद्र मंथन से पैदा हुई माता लक्ष्मी का जन्म इसी तिथि को हुआ था, इसलिए दीपावली को उनके जन्म दिवस के रुप में मनाया जाता है। वहीं कुछ लोग भगवान विष्णु की वैकुण्ठ में वापस के दिन के रूप में मनाया जाता है।

लोगों के बीच ऐसी मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी जी प्रसन्न रहती हैं उनकी पूजा करते हुए उनसे जो भी उनसे मन वांछित फल मांगा जाता है उसे पूर्ण करती हैं तथा हर साल मानसिक तथा शारीरिक दुखों से दूर रहने का भी वरदान देती हैं।

भारत के पूर्वी क्षेत्र जैसे उड़ीसा और पश्चिम बंगाल आदि जगहों पर लक्ष्मी जी की पूजा ना होकर काली जी की पूजा होती है तथा वहां इस त्यौहार को काली पूजा के नाम से जाना जाता है। भारत के उत्तर मध्य में कुछ शहर में जैसे कि अवध के क्षेत्रों में इस त्यौहार को श्रीकृष्ण से जोड़कर देखा जाता है तथा वहीं अन्य शहरों में इसे त्यौहार को गोवर्धन पूजा की दावत में श्री कृष्ण जी को 108 किया इसका आधार अर्थात 56 विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। वहीं भारत के पश्चिमी भागों में दिवाली को नए वर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है।

दीपावली का आर्थिक महत्त्व:-

दीपावली भारत में खरीदारी की सबसे बड़ी सीजन के रूप में माना जाता है सभी लोग दीपावली के त्यौहार में कुछ ना कुछ जरूर खरीदते हैं। दीपावली के त्यौहार की तुलना पश्चिमी सभ्यता के क्रिसमस के त्योहार से भी की जाती है क्योंकि क्रिसमस में पश्चिमी सभ्यता के लोग बहुत से सामान खरीदते हैं।

यही एक  जब भारत में सोना तथा अन्य बड़ी चीजों की खरीदारी का सबसे बड़ा समय माना जाता है। इस दिन खरीदारी करना शुभ माना जाता है क्योंकि माता लक्ष्मी जो कि धन की देवी मानी जाती हैं और जैसा कि हम सभी जानते हैं कुछ खरीदने के लिए धन की जरूरत अवश्य पड़ती है इसलिए इस दिन कुछ ना कुछ जरूर खरीदा जाता है क्योंकि यह माता लक्ष्मी का त्योहार माना जाता है। यह सीजन मिठाइयों और आतिशबाजी ओं का भी है, प्रत्येक वर्ष दिवाली के दौरान 5000 करोड़ रुपए से भी पटाखों आदि की खपत सिर्फ और सिर्फ भारत में होती है।

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 दीपावली का वैज्ञानिक महत्व

दिपावली का त्यौहार मनाने का एक वैज्ञानिक कारण भी है दिवाली वर्षा ऋतु के पश्चात आती है इसीलिए इस समय कीड़े मकोड़े फफूंदीयों का फैलाव ज्यादा होने लगता है अर्थात यह बड़ी तेजी से फैलने लगते हैं क्योंकि यह वातावरण कीड़े मकोड़े तथा फफूंदीयों के फैलने का होता है और जिस प्रकार से फैलते हैं अत्यंत भयानक बीमारियां भी पैदा कर सकते हैं।

दिवाली के समय में घर की इस तरह से सफाई की जाती है कि कहीं भी किसी भी तरह की गंदगी ना रह जाए क्योंकि गंदगी से भी किट मकोड़े फैलते हैं जब गंदगी नहीं रहेगी तो कीट मकोड़ों का खतरा भी कम हो जाता है। दीपक जलने से कुछ कीट रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं जिसके कारण दीपक में जलकर उनकी मृत्यु हो जाती है इसी कारण से घर के कोने कोने में दीपक तथा मोमबत्तियां भी जलाई जाती हैं।

दीपक जलाने से घर का वातावरण भी शुद्ध हो जाता है। कुछ कीट पतंगे पटाखा जलाने के कारण भी मर जाते हैं क्योंकि पटाखा जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड ज्यादा निकलता है। यही कारण है कि दीपावली के त्यौहार में भयानक बीमारियों से भी बचाव होता है।

दीपावली  पर्वों का समूह:- दिवाली के दिन भारत के भिन्न-भिन्न स्थानों पर मेला लगता है। दिवाली सिर्फ 1 दिन का त्यौहार नहीं अपितु यह कई पर्वों का समूह है। दशहरे के कुछ दिनों के पश्चात ही दीवाली की तैयारियां प्रारंभ हो जाती है। लोग नए वस्त्र सिलवाते हैं वैसे आज के समय में तो लोग नए वस्त्र खरीदते हैं क्योंकि सिलवाने मैं बहुत समय जाया होता है दिवाली के दो दिन पूर्व ही ‘धनतेरस’ पड़ता है।

ऐसी मान्यता है कि धनतेरस जिस तिथि पर पड़ता है उस तिथि में लौकिक सागर में देवताओं तथा राक्षसों के मंथन से धनवंतरी जी उत्पन्न हुए थे अतः धनतेरस को धनवंतरी जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है धनवंतरी जी को देवताओं का वैद्य भी कहा जाता है। धनतेरस के दिन बाजार में जनसैलाब उमड़ पड़ता है।

विशेषकर की बर्तनों की दुकानों पर अधिकतर भीड़ होती है क्योंकि दीपावली पर बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है इसी कारण बर्तनों की दुकानों की विशेष साज-सज्जा की जाती है। प्रत्येक लोग अपनी सुविधा के अनुसार बर्तन खरीदते हैं। इस दिन घर के दरवाजे पर तेल का दीपक जलाया जाता है। धनतेरस के पश्चात अगले दिन ‘नरक चतुर्दशी’ होती है जिसे हम ‘छोटी दीपावली’ भी कहते हैं नरक चतुर्दशी के दिन यमराज की पूजा होती है तथा कुछ ऐसी मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान जी की जयंती भी पड़ती है|

अतः इसे हनुमान जी की जन्मदिवस से भी जोड़कर देखा जाता है। नरक चतुर्दशी के पश्चात ‘दीपावली’ आती है दीपावली के दिन सुबह से ही पकवान बनने लगते हैं लोग अपने मित्रों तथा संबंधियों को उपहार अथवा मिठाई के साथ-साथ दीपावली की शुभकामनाएं देते हैं तथा शाम में माता लक्ष्मी तथा गणेश भगवान की पूजा करने के पश्चात घर में दिए  तथा मोमबत्ती जलाते हैं तथा दीपावली के दिन लोग अपने घरों को झालर से अर्थात रंग बिरंगी लाइटों से सजाते हैं जिससे घर रोशन तथा बहुत ही सुंदर दिखता है बच्चे पूजा के पश्चात पटाखे फोड़ते हैं तथा आतिशबाजीयों का लुफ्त उठाते हैं पटाखों में अनार, रंग-बिरंगी फुलझड़ियों का आनंद बच्चे ही नहीं अपितु हर वर्ग, हर आयु के लोग उठाते हैं।

दीपावली के पश्चात ‘परिवा’ आता है ऐसी मान्यता है कि श्री कृष्ण उसी दिन गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रज वासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाते हैं कुछ जगह पर ऐसी मान्यता भी है कि इस दिन किसी प्रकार की पढ़ाई अथवा लिखाई नहीं होती है। परिवा के पश्चात ‘भाई दूज’ का त्यौहार आता है इसे यम द्वितीया भी कहते हैं इस दिन भाई बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनके मंगल की कामना करती हैं तथा भाई उन्हें अपनी तरफ से यथाशक्ति भेंट देते हैं।

दिवाली का त्यौहार प्रकाश की विजय का स्वरूप है जैसे कहीं भी अंधेरा तभी तक टिकता है जब तक कि वहां प्रकाश ना आए उसी प्रकार असत्य भी तभी तक किसी जगह पर स्थिर है जब तक कि वहां सत्य की उपस्थिति ना हो। भारत में सभी त्योहार भाईचारे और प्रेम का संदेश देते हैं।

भारत में कोई भी त्यौहार अकेले नहीं मनाया जाता यही कारण है कि भारत में लोगो के बीच की एकता की मिसाल आज पूरे विश्व में दी जाती है। भारत के हर हिस्से में दीपावली के त्यौहार भले ही अलग तरीके से मनाया जाए परंतु इस त्यौहार की असली मकसद सबको साथ लेकर चलना भाईचारा तथा प्रेम का संदेश देना है।

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यह त्योहार पीढ़ियों से जिस प्रकार चला रहा है उसी प्रकार मनाया जाता है भारत में किसी भी त्योहार में जो लोग बाहर अपने घरों से दूर रहते हैं वह वापस अपने घर को वापसी करते हैं और अपने परिवार के साथ उस  त्योहार को खुशी खुशी मनाते हैं।

दीपावली की खामियां:- कुछ खामियां इस त्यौहार की सामने आती हैं जैसे

    •  प्रदूषण:- लोग दीपावली के त्यौहार की खुशी में आतिशबाजी तो करते हैं पर वे यह भूल जाते हैं कि इससे कितना प्रदूषण फैलता है। आतिशबाजी में सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण फैलता है क्योंकि आतिशबाजी करते वक्त वायु प्रदूषण पता तो नहीं चलता परंतु आतिशबाजी के बाद इसका प्रकोप देखने को मिलता है, जैसे जो अस्थमा के मरीज होते हैं उनको सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।दूसरा सबसे बड़ा प्रदूषण होता है ध्वनि प्रदूषण क्योंकि आजकल के लोग ऐसे पटाखे ज्यादा बजाये जाते हैं जिनसे बहुत ज्यादा आवाजें आती है अतः ध्वनि प्रदूषण भी फैलता है तो हमें दिवाली मनानी चाहिए लेकिन अपने पर्यावरण को सुरक्षित भी रखना चाहिये।
    •  जलने की घटनाएं:- दिवाली के त्यौहार पर जलने की घटनाएं बहुत ज्यादा होती हैं यह घटनाएं आपको दिवाली के अगले दिन के अखबारों में जरूर मिल जाएंगी क्योंकि आजकल सभी युवा आतिशबाजी के चक्कर में बहुत ही गलतियाँ किया करते हैं जैसे किसी दोस्त ने कहा कि यह पटाखा तुम अपने हाथ में रखकर बजा सकते हो अगर तुम बजा लोगे तो मैं तुम्हें इनाम दूंगा।इसी इनाम के लालच में लोग इस तरह के गलत काम करते हैं जिससे जलने की घटना सबसे ज्यादा सुनाई देती है। दीपावली के त्यौहार में यह घटना सबसे ज्यादा देखने को मिल जाती है और आतिशबाजी के चक्कर में लोग अपनी सुविधा का ध्यान रखते हुए भी कई गलतियां करते हैं जैसे पटाका ऐसी जगह पर बजाना जहां पर और ढेर सारे पटाखे रखे हो पटाखा बजाते समय पानी ना रखना यह सभी गलतियां हैं जो आज के युवा आतिशबाजी करते वक्त करते हैं जिसके कारण वह इस तरह की घटनाओं का शिकार भी होते हैं।
  • जुआँ खेलना:- दीपावली के अगले दिन परिवा पड़ता है उस दिन अधिकतर जगहों पर काम नहीं होता अतः लोग अपना खाली समय व्यतीत करने के लिए जुआ जैसी गलत कामों में लिप्त पाए जाते हैं जबकि जुआ खेलना भारत में वैध नहीं है तब भी लोग इसे खेलते हैं किसी ने सही कहा है “खाली दिमाग शैतान का घर होता है।”तो दोस्तो कैसी लगी हमारी दिवाली पर निबंध (Diwali Essay in Hindi) – दीपावली का निबंध हिंदी में।हमने आपको इस लेख में दिवाली से जुडी सभी जानकारी प्रदान की है। मुझे यकीन है की अब आपको दिवाली पर निबंध (Diwali Essay in Hindi) – दीपावली का निबंध हिंदी में, के बारे में सब जानकारी मिल चुकी है।और आप अब इस वेबसाइट को बहुत ही आसानी से इस्तेमाल कर सकते है।यदि आपको किसी भी प्रकार का कोई भी सवाल है तो आप हमें कांटेक्ट करें  हम आपके सवालो का जवाब देने के लिए पुरी कोशिश करेंगे।हमारे इस पोस्ट को पढने के लिए हम आपका आभार व्यक्त करते है। इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगो को facebook, whatsapp जैसे सोशल मीडिया पर जरुर शेयर करे।

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