जयललिता की जीवनी – जयललिता का जीवन परिचय

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जयललिता की जीवनी – जयललिता का जीवन परिचय – J Jayalalithaa Biography in Hindi

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पूरा नाम          –           जयललिता जयराम

जन्म स्थान        –           २४ फरवरी १९४८, मंडिया, मैसूर राज, चेन्नई

जन्म दिवस       –           २४ फरवरी १९४८

राजनीतिक दल  –          आल इंडिया द्रविड़ द्रविड़ मुनेत्र कनगम

पेशा               –                 राजनेता, अभिनेत्री

धर्म                –           हिन्दू

पिता                –           जयराम

मृत्यु                 –         8 दिसम्बर 2016

जयललिता जयराम जिन्हे ‘अम्मा’ के नाम से भी जाना जाता है, तमिल नाडु के राजनीतिक इतिहास की महत्त्वपूर्ण किरदार है। इनका राजनीतिक जीवन और निजी जीवन एक दुसरे से जुड़ा हुआ है। एमजी रामचंद्रन के साथ उनके सम्बन्धो पर हमेशा सवाल उठाये गए।

एमजी रामचंद्रन की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी और जयललिता में उनके उत्तरदायित्व के लिए सियासी जंग चली। बहुत संघर्ष के बाद जयललिता को एमजी रामचंद्रन का उत्तरदायित्व मिला और उन्होंने अण्णा द्रमुक पार्टी के महासचिव के रूप में सपथ ली।

१९९१ से लेकर २०१४ तक उन्होंने तमिल नाडु के मुख्यमंत्री पद को संभाला और चर्चित रही।

उनके जीवन में एमजी रामचंद्रन से मिलना उनके जीवन की मुख्या घटना थी। राजनीती में आने से पहले जयललिता बहुत मशहूर अभिनेत्री थी। एमजी रामचंद्रन और जयललिता ने साथ में बहुत काम किया और लम्बा समय फ़िल्मी दुनिया में बिताने के बाद साथ में ही राजनीती में भी प्रवेश किया।

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प्रारंभिक जीवन

जयललिता ने बहुत छोटी उम्र से ही अपनी कला का प्रदर्शन शुरू कर दिया था। महज़ १५ साल की उम्र में जयललिता ने अपनी पहली फिल्म में काम किया था। जयललिता का जन्म अय्यर भ्रामिन परिवार में हुआ था और उनके दादा मैसूर राज्य में सर्जन के तौर पे काम किया करते थे। महज़ दो साल की उम्र में उनके पिता का देहांत हो गया था जिसके बाद नन्ही जयललिता माँ के साथ बैंगलोर में रहने लगी। जयललिता को फ़िल्मी दुनिया का रास्ता उनकी माँ ने ही दिखाया, वह तमिल सिनेमा में ‘संध्या’ के नाम से प्रचलित हुई।

जयललिता की शुरुआती शिक्षा चेन्नई और बैंगलोर में ही हुई।

अभिनेत्री के रूप में जयललिता

जयललिता ने स्कूल के दिनों में १९६१ ‘एपिसेल’ नाम की अंग्रेजी फिल्म में काम किया। १५ साल की उम्र से ही जयललिता ने अभिनय शुरू कर दिया था। कन्नड़ भाषा में चिन्नडा गोम्बे उनकी पहली फिल्म थी। यह फिल्म १९६४ में प्रदर्शित हुई। जयललिता की भाषा पर पकड़ उनकी फिल्म्स में साफ़ दिखाई देती है। अपने फ़िल्मी करियर में जयललिता ने विब्भिन प्रकार के किरदार निभाए।

जयललिता मुख्या रूप से तमिल फिल्मजगत का हिस्सा मानी जाती है लेकिन उन्होंने सभी भाषाओ के सिनेमा में अपने अभिनय का प्रदर्शन किया है। अपने ज़माने की वह पहली तमिल अभिनेत्री थी जिन्होंने स्कर्ट में सीन्स दिए थे जो की फिल्म के लिए विवाद का विषय रहा।

उन्होंने ज्यादातर एमजी रामचंद्रन और गणेशन के साथ जोड़ी बनायीं और कई चलचित्रो में इसी जोड़े के रूप में काम किया।

राजनीतिक जीवन

जयललिता का राजनीती में प्रवेश एमजी रामचंद्रन के साथ ही हुआ। आल इंडिया द्रविड़ मुनेत्र कनगम नाम से जयललिता और रामचंद्रम ने अपनी पार्टी की शुरुआत की। उनकी वाक्पटुता और अंग्रेजी भाषा के ज्ञान की वजह से एमजी रामचंद्रन ने उन्हें राज्यसभा में नियुक्त करवाया और वह विधानसभा की सदस्य भी रही।

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१९८४ से १९८९ तक जयललिता राज्यसभा की सदस्य रही और पार्टी का कार्यभार संभाला। वाक्पटुता और प्रसिद्धि के चलते उन्हें जयललिता से ‘अम्मा’ बनने में कोई कठिनाई नहीं आई। इसी बीच उनके निजी जीवन में कई उतर चढ़ाव आये एमजी रामचंद्रन से उनके सम्बन्ध भी ख़राब हुए।

रामचंद्रन को स्ट्रोक आने के समय जब जयललिता ने उनकी जगह लेनी चाही तोह रामचंद्रन ने गुस्से में उन्हें उप मुख्यमंत्री पद से भी निरस्त कर दिया। १९७८ में रामचंद्रन के निधन के बाद अण्णा द्रमुक पार्टी दो हिस्सों में बट गयी। एक की कमान रामचंद्रन की पत्नी जानकी रामचंद्रन ने संभाली और दूसरे हिस्से को  जयललिता ने संभाला।

रामचंद्रन को जयललिता साथी, गुरु और उनकी कहानी का मुख्य पात्र मानती थी। इसीलिए उनकी मृत्यु के समय उनके आखिरी दर्शन के लिए रोके जाने पर भी जयललिता उनके करीब खड़ी रही। उनकी पत्नी और परिवार को हमेशा जयललिता खटकती थी। जयललिता ने खुद को रामचंद्रन की विरासत का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

१९९१ में जयललिता ने कांग्रेस के साथ सर्कार बनाई और तमिल नाडु की सबसे पहली महिला प्रधानमंत्री बनी। इतना ही नहीं वह तमिल नाडु की सबसे पहली कम उम्र की प्रधानमंत्री भी थी। जयललिता के राज में तमिल नाडु में कई योजनाए आयी जो की मुख्य रूप से महिलाओ के हित में थी।

क्रैडल बेबी स्कीम के तहत हज़ारो अनाथ बालिकाओ को शिक्षा और रहने का आसरा मिला ।

१९९६ में उनके ऊपर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगे। जयललिता उर्फ़ ‘अम्मा’ ने कभी शादी नहीं की लेकिन उनके दत्तक पुत्र वियन सुधाकरन की शादी में उन्होंने दोनों हाथो से दौलत लुटाई जिसके बाद उनकी आर्थिक संपत्ति पर सबकी नज़र पड़ी।

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छापेमारी में उनके घर से असीम मूल्यवान गहने और साड़िया मिली। इसी वर्ष जयललिता चुनाव हार गयी।

कई दिनों तक उनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप चलते रहे और मद्रास न्यायलय में उनके खिलाफ मुकदमे भी चलते रहे। २००१ में चुनाव हुए और जयललिता फिर से तमिल नाडु की मुख्यमंत्री बनी। साशन में आने के बाद उन्होंने कई काम किये लॉटरी बंद करवा दी, धरना दे रहे लाखो कर्मचारियों को नौकरी से निरस्त कर दिया।

निधन

५ दिसंबर २०१६ को अपोलो अस्पताल में ११:३० बजे उनका निधन घोषित कर दिया गया| जिसके बाद उनके चाहने वालो का हुजूम उमड़ आया और सभी उनकी आखरी झलक के लिए बेताब हो गए। उनकी मृत्यु का कारन दिल का दौरा बताया जाता है। उन्हें द्रविड़ आंदोलन से जुड़े होने के कारन दफनाया गया क्योकि द्रविड़ आंदोलन सभी हिन्दू रस्मो को नहीं मानता। पार्टी के सभी नेता इसी आंदोलन से जुड़े थे इसीलिए रामचंद्रन को भी दफनाया गया था।

जयललिता जयराम की समाधी भी जयराम के पास ही बनायीं गई। दफनाए जाने की वजह राजनीतिक भी बताई जाती है। हलाकि जयललिता की आस्था और जीवनी के चलते एक हिन्दू पंडित ने ही उनकी अंतिम क्रिया करवाई।

जयललिता जयराम तमिल नाडु की राजनीति में अविस्मरणीय नाम है।