मोटू और पतलू की जोड़ी की कहानी , Motu Patlu Story in Hindi

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मोटू और पतलू की जोड़ी की कहानी Motu Patlu story in Hindi  Motu Patlu in Hindi 

मोटू और पतलू की जोड़ी की कहानी motu patlu story in hindi  Motu Patlu in Hindi 

दोस्तो आज हम मोटू और पतलू की जोड़ी की कहानी , Motu Patlu Story in Hindi के बारे में जानेंगे। मोटू और पतलू की दोस्ती की कहानी बच्चों को बहुत अच्छी लगती है|

चलिए मोटू और पतलू की कहानी (Motu Patlu Story in Hindi विस्तार में पढ़ते हैं।

 

मोटू और पतलू की जोड़ी की कहानी

 

एक गांव में पतलू और मोटू  दो बहुत अच्छे दोस्त रहते थे, पतलू 6 साल का था और मोटू 10 साल का था । पतलू और मोटू की दोस्ती पूरे गांव में चर्चा का विषय था । दोनों दोस्त पूरे गांव में अपनी शरारतों के लिए जाने जाते ।

पतलू:- मोटू भाई आज कौनसा खेल खेलें?

मोटू :- आज हम छुपन छुपाई खेलेंगे ।

इन दोनों की बात सुनकर माँ इनको खेलने से मना करती है और खाना खाने के लिए बोलती हैं, वह दोनों मुँह बनाते हुए घर की तरफ निकलते हैं ।

माँ:- अब तुम दोनों इधर बैठो मैं खाना लेकर आई और आज कोई शरारत करने की सोची तो मेरे से बुरा कोई नही होगा ।

मोटू:- माँ हम शरारत नहीं करते हम तो अपना खेल खेलते हैं , आपको किसने कहा ।

माँ:- अच्छा जी!, कल तुमने विमला आंटी के घर बार बार घंटी क्यों दबा रहे थे? वो परेशान हो गई काफी ।

पतलू :- अरे!, माँ, वो तो हम उनके घर की घंटी को चेक कर रहे थे कि बजती है या नहीं ।

यह बात सुनकर माँ को हंसी आ गई और वह रसोई घर चली गई ।

पतलू और मोटू दोनों ने सब्जी लेने को मना कर दिया और कहा हमे आचार के साथ खाना दें ।

मां रोटी परोसती है पहली रोटी पतलू के लिए और जब तक मोटू की रोटी आती है तब तक पतलू खाली थाली लिए बैठा हुआ होता है ।

माँ(पतलू से) :- अरे! आज तूने रोटी ज्यादा जल्दी नहीं खाली ? 

पतलू:- आज आप धीरे बना रहे है ।

जब मां पतलू की दूसरी रोटी लेकर आती है तब तक मोटू की थाली भी खाली होती है, माँ हैरान हो कर मोटू से पूछती है :- अरे! यह क्या तुमने भी खत्म कर दी ?

मोटू पतलू मोटू पतलू

मोटू:- माँ हमने खेलने जाना है इसीलिए।

माँ:- अच्छा ! चले जाना खेलने पहले खाना तो खालो।

माँ हम दोनों ने खत्म कर दिया खाना हम जा रहे है खेलने।

दोनों चले जाते हैं जब माँ रसोई घर से आती हैं और उन दोनों के बर्तन उठाती हैं तो उसके नीचे से रोटियां मिलती है तो हसने लग जाती है और खुद से कहती है :- यह दोनों बच्चे कभी नहीं सुधरेंगे।

पतलू:- चलिए भैया! खेल शुरू करते हैं, मैं छुपता हूँ आप मुझे ढूंढना।

मोटू:- नहीं तू छोटा है तो हमेशा तू पहले नहीं छुपेगा । मैं छुपता हूँ तू मुझे ढूंढना

पतलू:- नहीं भैया ! मैं ही छुपता हूँ।

मोटू : नहीं आज मेरी बारी होगी

पतलू जोर जोर से रोने लगता है और माँ को बताने की धमकी देता है।

मोटू:- अच्छा अच्छा चुप हो जा, चल यह पथर उछालते हैं अगर साफ हिस्सा आया तो मैं जीता हुआ नहीं तो तू ।

पतलू इस तरकीब को मैन जाता है और पत्थर उछालता है । जीत मोटू की आती है ।

पतलू गिनती की शुरुआत कर रहा होता है तभी उसे मोटू रोक लेता है ।

मोटू:- अरे इधर नहीं खेलेंगे आज । यहाँ तू मुझे आसानी से ढूंढ लेगा

पतलू:- आप तो पहले ही हार गए । हाहाहाहा….

मोटू:- मैं हारा नहीं, चल जंगल की तरफ चलते है वहाँ नई जगह मिलेगी छुपने के लिए

पतलू :- नहीं! माँ ने मना किया है।

मोटू:- माँ को नही पता चलेगा

दोनों जंगल की तरफ निकल जाते है और अपना खेल चालू करते है। पतलू एक पेड़ के तरफ मुँह करके गिनती चालू करता है और मोटू ठीक उसी पेड़ के पीछे एक कुएं के अंदर छुप जाता है। पतलू उसे ढूंढ रहा होता है परन्तु तकरीबन आधे घण्टे ढूंढने के बाद वह हार मान जाता है और मोटू को बुलाने लगता है।

मोटू बाहर निकलने के लिए जैसे ही पैर आगे बढ़ाता है उसका पैर फिसल जाता है और वह पानी से भरे कुँए में गिर जाता है। मोटू आवाज देकर पतलू को बुलाता है।

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मोटू को तैरना बिल्कुल भी नहीं आता और वह पतलू को मदद के लिए बुलाता है। पतलू पहले तो काफी जोर से चीख के मदद मांगता है परन्तु जंगल के काफी अंदर होने के कारण उनकी आवाज कोई नहीं सुन पाता।

आखिर मे वह थक कर खुद ही कोशिश करता है वह कुँए के साथ टंगे बाल्टी को कुँए में फैंकता है और मोटू को उसे पकड़ने को कहता है और जोर लगाता है जब तक मोटू सही सलामत बाहर न आ जाए।

मोटू के कपड़े पानी मे काफी भीग चुके थे अब वह घर जाने को काफी डर रहे थे , पतलू के कपड़े भी पसीने के वजह से काफी गंदे हो गए थे। वह दोनों जैसे तैसे घर पहुंचे। और उनकी हालत देखकर माँ गुस्सा हो जाती है उन्हें गांव के सबसे आदरणीय बुजुर्ग इंसान के पास ले जाती है जिनकी सब बात मानते है । वह गांव के सबसे समझदार व्यक्ति माने जाते हैं ।

माँ (बुजुर्ग इंसान से) :- देखिए बाबा जी इन दोनों बच्चों से मैं तंग आ चुकी हूं अब आप ही समझाइए इन्हें ।

बाबा जी :- अरे! पहले बताओगे क्या समझाना है तभी समझाऊंगा न ।

माँ:- यह दोनों उस जंगल मे जाके अपने पूरे कपङे गंदे करके आ गए और यहाँ आकर झूठ बोल रहे हैं, कह रहे हैं कि एक पानी के कुँए में गिर गया और दूसरे ने जान बचाई पर हैरानी वाली बात यह है कि इस पतलू ने जान बचाई । इसमें ताकत तो है नहीं । इन दोनों की शरारत से मैं पहले से ही परेशान हूँ और अब इनका झूठ ।

बाबा जी :- अरे! इसमें परेशान होने की क्या बात । सही तो कह रहे हैं दोनों पतलू ने मोटू को बचाया होगा । 

सभी बाबा जी की यह बात सुनकर हैरान हो जाते है और उनसे पूछने लगते हैं कैसे ।

बाबा जी :- जैसे इन्होंने कहा कि मोटू पानी से भरे कुँए में गिर गया और पतलू ने जान बचाई बाल्टी को कुँए में डाल कर । तुम्हे मालूम है ऐसा क्यों हुआ , क्योंकि उस वक्त उन्हें कोई यह कहने वाला नहीं था कि तुम यह नही कर सकते । इन दोनों के बीच मे इनका अनमोल और मजबूत रिश्ता और पतलू अपने ऊपर और मोटू का पतलू पर विश्वास ही मोटू को बचा पाया।

पतलू :- लाल

मोटू:- पिला

माँ:- हरा

बाबा:- नीला

सीख:- हमेशा अपने ऊपर विश्वास रखे , आप जिंदगी में सब कुछ कर सकते हैं।

आज की पोस्ट के माध्यम से आपने मोटू और पतलू की जोड़ी की कहानी , Motu Patlu Story in Hindi के बारे में जाना| और आपको इस पोस्ट के द्वारा हमने मोटू पतलू नाटक के बारे में भी बताया। आशा करते है की आपने इस पोस्ट के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की होगी।

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