आज का सुविचार इन हिंदी | Aaj Ka Vichar in Hindi – Today’s Thought in Hindi

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आज का सुविचार इन हिंदी | Aaj Ka Vichar in Hindi – Today’s Thought in Hindi

भारत विविधताओं का देश है और यहां बोली जाने वाली 22 प्रमुख भाषाएं हैं जिनमें से हिंदी भारत की आधिकारिक भाषा है

आधुनिकीकरण और भूमंडलीकरण को ढालने की प्रक्रिया में हमारी पीढ़ी तेजी से हमारे देश की संस्कृति और मौलिकता का हाथ छोड़ रही है.

हमारी संस्कृति अद्वितीय और इतनी मंत्रमुग्ध है, कि परदेशी ,भारत में रहे हैं और उस पर अनुसंधान कर रहे हैं.   भले ही आज की पीढ़ी के लिए आधुनिकीकरण निस्संदेह जरूरी है, लेकिन हमें अपनी जड़ों को भी नहीं भूलना चाहिए दुनिया में अंग्रेजी बोलने में हमारा देश सबसे ऊपर है.

हालांकि, भारत में हिंदी हमारी ज्यादातर इस्तेमाल कि गई भाषा है टॉप कॉलेजे, इंग्लिश मीडियम स्कूलों में बच्चों को अंग्रेजी में बोलना सिखाया जाता है जो पूरी तरह से स्वीकार्य है, हिंदी भाषा  भी प्रोत्साहित किया जा सकता है, अगर  ध्यान दिया जाए तो आप चौंक जाएंगे कि, हिंदी में बोलना तो युवाओं के कार्यकाल मेंपुरानी सोच” है जो बड़े सांस्कृतिक झटके है तथा आज के युवाओं का यह विचार है I

हमारी पीढ़ी पश्चिमी संस्कृति के लिए अनुकूल  है  परंतु एक प्रमुख भाषा के रूप में हिंदी, दुख की बात धीरे धीरे लुप्त होती है

हिंदी लोकप्रिय संस्कृति  है  परंतु या तो हाल ही में  पर्याप्त आउटलेट, अनुयायियों और ही संरक्षक नहीं मिला है संगीत, सिनेमा, साहित्य आदि जैसे लोकप्रिय संस्कृति के प्रमुख प्रभावितों ने स्वयं को एक अलग भाषा (मिश्रित सड़क की भाषा या संगीत मिश्रित भाषा के मामले में) की ओर ले जाया है

 

अंग्रेजी धाराप्रवाह बोलते हुए (और अच्छी तरह से लेखन) अपने कैरियर की संभावनाओं पर एक व्यापक प्रभाव पड़ता है देश के शीर्ष संस्थान सभी अंग्रेजी में पढ़ाते हैं जबकि देश के शीर्ष नियोक्ता भी वरिष्ठ स्तर पर मुख्यतः अंग्रेजी में ही व्यवसाय करते हैं

आज का युवा इस खूबसूरत भाषा हिंदी का इलाज निरक्षरों और गरीब लोगों की भाषा के रूप में कर रहा है

 

हमें भूलना नहीं चाहिए कि   प्रसिद्ध  उपन्यास और शायरी इस खूबसूरत भाषा में सबसे रोमांटिक रूप लिखा हुआ है जो की  सिर्फ उदाहरण है, मुझे कहना होगा, आधुनिक करने के लिए बदलने के प्रवाह में, हम नहीं भूलना चाहिए और खाई हमारी अपनी संस्कृति और ज्यादातर हमारी भाषा .

आँकड़ों के अनुसार भारत में अंग्रेजी भाषियों की संख्या १२५,०००,००० है और वह भारत की कुल जनसंख्या का सिर्फ १२.१८% है

इसके विपरीत हिंदी भाषी लोगों की संख्या ५५१,०००,००० है जो कि भारतीय लोगों की ५३.६०% है  

इसलिए, भले ही हममें से बहुत से अंग्रेजी के प्रयोग में वृद्धि हो रही हो और हमारे आसपास हिंदी को कम करने का प्रयोग हो रहा हो, यह संभवतः समूह ध्रुवीकरण का एक प्रभाव है और जैसा कि ऊपर कहा गया है, इस समूह की आबादी का सिर्फ १२.१८% है

भाषा के रूप में  संचार के माध्यम से परे कुछ और है कि आम तौर पर संस्कृति में घुल रह है संस्कृति जीवन का अंग है अतएव एक cअंधराष्ट्रीवादी  होने या सामाजिक अंतर्विरोध पर विश्वास करने के कारण मैं वास्तव में हिन्दी के उज्ज्वल भविष्य की मुझे उम्मीद है पहले जो कर रहे हो, उसको तवज्जो दो, उसका अंजाम क्या होगा, यह बाद में सोचना. – सैमुअल बेकेट

आज का सुविचार  Quotes:

समय सीमा पर काम खत्म क्र लेना काफी नहीं है, मैं समय सीमा से पहले काम खत्म होने की अपेक्षा करता हूँ. – धीरूभाई अम्बानी

जिन्दगी चुनौतियों से भरी हुई है, कई बार आपको हार का भी सामना करना पड़ता हैं. अपनी हार को स्वीकार करें, उससे सबक लें और आगे बढ़े. हर से मिले सबक को कभी नहीं भूलना चाहिए – अजीम प्रेमजी

जीवन सीखने का नाम हैं. हम सब आखिरी सांस तक अगर चाहें तो कुछ-न-कुछ सीख सकते हैं. – रामकृष्णा परमहंस

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