बिहार के शिक्षा मंत्री कौन है 2020 में | Bihar Ke Shiksha Mantri in 2020

बिहार के शिक्षा मंत्री कौन है  : बिहार देश के उत्तरी हिस्से में बसने वाला एक हिंदी भाषी प्रदेश है. प्राचीन काल से ही अस्तित्व में रही बिहार की भूमि अपनी शिक्षा व्यवस्था के लिए पूरी दुनिया में प्रख्यात थी और पूरी दुनिया से विद्यार्थी यानी ज्ञान एवं विद्या ग्रहण कर विद्वान् बनने आते थे. उस समय यह मगध राज्य के नाम से जाना जाता था. इस राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र हुआ करती थी तथा तक्षिला एवं नालंदा विश्विद्यालय पूरे भारतवर्ष के विश्व प्रसिद्द शिक्षा केंद्र हुआ करते थे. यहाँ धर्मशास्त्र, खगोलशास्त्र, रसायनशास्त्र से लेकर विदेशी भाषाओँ पर अध्ययन तथा चिकिस्ता पद्यति भी पढ़ाई जाती थी जिनमें उस समय की शल्य चिकित्सा और आयुर्वेदा शामिल है.

बिहार के शिक्षा मंत्री कौन है_

बिहार के शिक्षा मंत्री (education minister of Bihar):  श्री कृष्ण नंदन प्रसाद वर्मा (Krishna Nandan Prasad Verma)

बिहार में अनेको विद्वानों ने जन्म लिया हुआ है जिनमें से कुछ शिक्षा मंत्री के तौर तत्कालीन राज्यों में कार्यत रहा करते थे. परन्तु आज समय दूसरा है. आज हामरे देश में लोकतान्त्रिक संघीय व्यवस्था है. शिक्षा व्यवस्था हर राज्य में अलग तरीके से लागू है. स्वाभाविक सी बात है कि स्कूली शिक्षा हो या कॉलेज या यूनिवर्सिटी स्तर की शिक्षा हो, सबका अपना ही महत्व है और राज्य सरकारों की अधीन आने वाले संस्थानों में इनके प्रति अलग व्यवस्था भी लागू है. राज्य में जनता द्वारा चुनी हुई सरकार होती है और उसी सरकार की मंत्रीपरिषद् यानी कैबिनेट ऑफ मिनिस्टर्स में अलग-अलग विभाग संभालने के लिए मंत्री होते है.

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इसी तरह शिक्षा विभाग के लिए बिहार में कैबिनेट शिक्षा मंत्री नियुक्त किये जाते है. साल 2020 में बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन प्रसाद वर्मा है. वह साल 2017 में भारतीय जनता पार्टी एवं जनता दल यूनाइटेड के साथ आने के बाद बनी एनडीए सरकार में मंत्री बनाये गए. उनको इस पद पर बने अभी 3 साल पूरा होने को है और वह साल 2017 से लगातार इस पद पर कार्यत है. वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता है और घोसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक है. वह पटना विश्वविद्यालय से स्नातक कर चुके है.

बिहार के शिक्षा के बारे में विस्तार से 

शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने नीतीश सरकार की कई योजनाओ को लागू करने में अहम भूमिका निभाई है और बिहार बोर्ड में होने  नक़लचीपन पर लगाम लगाने में अहम योगदान दिया है. वह अक्सर ही बिहार की शिक्षा नीति को सुधारने के लिए छात्रों के बीच जाते हुए दिख जाते है. जनता के बीच में भी उनकी सकारात्मक छवि है किन्तु विपक्ष उन्हें एक विफल शिक्षा मंत्री के तौर हमलावर रहती है.

साल 2011 जनगणना के आंकड़ों के अनुसार बिहार में साक्षरता दर यानी अपनी भाषा बोलने एवं लिखने वालों की दर 61.8% थी जिनमें महिलाओं में साक्षरता प्रतिशत 51.50 % थी तो वहीं पुरुषों की साक्षरता दर (literacy rate) 71.20 % थी.

बिहार तो काफी बड़ा शिक्षा केंद्र हुआ करता था किन्तु आज के समय में उसकी शिक्षा व्यवस्था काफी लचर हो चुकी है जिसके चलते काफी समय से आलोचना एवं दुष्प्रचार किया जा रहा है. इस बार के हुए परीक्षाओं में भी पिछली बार की तुलना में छात्रों से काफी बेहतर प्रदर्शन किया है.

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