Kartik Vashist Biography | फुटबॉलर कार्तिक वशिष्ठ के जीवन परिचय

युवा फुटबॉलर Kartik Vashist के जीवन की कहानी जिन्होंने जमीन से आसमान तक का तय किया सफर 

Kartik Vashist, भारत में सबसे महत्वपूर्ण खेल क्रिकेट को माना जाता है। और भारत कि जनता को क्रिकेट में काफी ज्यादा रुचि है। परन्तु फिर भी कई ऐसे मेहनती खिलाड़ी है जो अपने हुनर के दम पर अपनी पहचान बना लेते हैं। चाहे वह खिलाड़ी किसी भी खेल से संबंधित हो।

आज हम एक ऐसे फुटबॉल खिलाड़ी की बात करने वाले हैं जिनके लिए फुटबॉल सिर्फ एक खेल नही बल्कि जिंदगी है। 

Kartik Vashist जिनका जन्म हरियाणा के एक छोटे से जिले करनाल में हुआ था। इन्होंने अपने खेल के बल पर न सिर्फ पूरे राज्य को बल्कि देश को भी गौरव से भरे कई पल दिए हैं। 

आपने अपने जीवन में ऐसे कई इन्सान देखे होगें जिनके जीवन में बहुत सारी परेशानिया होती है। व्यक्ति परेशानियों से पूरी तरह गिरा हुआ होने के कारण अन्दर से टूट जाता हैं। बाद में व्यक्ति के अन्दर अचानक से समस्याओं से लड़ने की क्षमता और ज़ुनून आ जाता है।।

फुटबॉलर कार्तिक वशिष्ठ का जीवन भी कुछ इसी तरह प्रेरणा से भरा है। Kartik Vashist आज जिस मुकाम पर उसके पीछे की कहानी बहुत ही कम लोगों को पता है।  

कार्तिक के जीवन  की कहानी रोमांटिक फिल्म की भांति है। जिसमें कार्तिक वशिष्ठ द्वारा किस प्रकार से जमीन से आसमान तक का सफर तय किया गया उसके बारे में बताया गया है। कार्तिक अपने जीवन में सभी असफलताओं का सामना करते हुए सफलता को हासिल करता है और जब कार्तिक सफलता की राह पर चलता है तो उसे इस बात का डर रहता है, कि कहीं वह असफल ना हो जाए।

कार्तिक द्वारा विषम परिस्थितियों होने के बावजूद भी अपने सपनों को जिंदा रखा और मेहनत करते हुए मंजिल प्राप्त की।

 तो चलिए जानते हैं एक लड़के (कार्तिक वशिष्ठ) की कहानी जो छोटे से शहर की तंग गलियों में कभी फुटबॉल खेला करता था और आज वह मामूली सा लगने वाला लड़का देश के Famous Footballer में से एक है, जो भारत का प्रतिनिधित्व कई देशों में कर चुके हैं। 

Biography of Footballer Kartik Vashist | फुटबॉलर कार्तिक वशिष्ठ के जीवन परिचय

कार्तिक वशिष्ठ का परिवार और प्रारंभिक जीवन

Kartik Vashist का जन्म 18 जनवरी 1996 को हरियाणा राज्य के एक छोटे से जिले करनाल में स्थित मधुवन पुलिस काम्प्लेक्स में हुआ था। इनका परिवार आर्थिक रूप से उतना सक्षम नही था। लेकिन जिनके सपनों में जान होती है वो खुद अपनी उड़ान भरते हैं। कार्तिक वशिष्ठ की पढ़ाई हरियाणा पुलिस पब्लिक स्कूल, मधुबन से हुई। जिस उम्र में बच्चे अपना होश संभालते हैं, उस उम्र में कार्तिक वशिष्ठ ने खेलना शुरू कर दिया था। 

कार्तिक वशिष्ठ को खेल से लगाव था और गलियों में खेलने वाला लड़का अब स्कूल में अपना नाम बनाने लगा, लेकिन इस वजह से वह पढ़ाई पर उतना ध्यान नही दे पाए और पढ़ाई  धीरे धीरे छूटने लगी। हर आम भारतीय माता पिता की तरह इनके माता पिता भी कार्तिक के द्वारा पढ़ाई पर ध्यान न देने की वजह से इन पर गुस्सा हुए और खेल पर प्रतिबंध भी लगाया। 

लेकिन खेल के लिए कार्तिक का जुनून इतना ज्यादा था कि माता पिता के ये प्रतिबंध भी उन्हें नही रोक सके और वो चोरी छुपे ही सही खेल के मैदान में पहुँच जाते थे। जब इनके पिता श्री महिंदर वशिष्ठ ने कार्तिक की प्रतिभा को देखा तो उन्होंने अपने बेटे को प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया और फिर आगे चलकर कार्तिक वशिष्ठ की सफलता का मुख्य स्तंभ बने। 

आज भी Kartik Vashist का कहना यही है कि अगर हमारे माता-पिता हमारे साथ हैं तो किसी भी काम को करने मे हमारी ऊर्जा दोगुनी हो जाती है| कार्तिक, अपने स्कूल के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल खिलाड़ियों में से एक थे, जिनके खेल को देखकर अक्सर इन्हें सराहा जाता था और लोग इन्हें  पसंद भी करते थे। लेकिन इन सब के बावजूद आर्थिक स्थिति इतनी ज्यादा खराब थी कि एक जोड़ी Football के जूते भी खरीदना बहुत मुश्किल था। 

जबकि उनके कोच (श्री शक्ति अविनाश) ने स्पष्ट कहा था कि, “यदि आपको यहाँ खेलना है तो Football शूज में कल से आना होगा वरना खेलने नही दिया जाएगा।”  फिर भी, Kartik Vashist ने आज जो कुछ भी सीखा है, उसका सारा श्रेय उन्हें ही जाता है। युवा कार्तिक ने कई जिले, शहर और राज्य चैंपियनशिप में भाग लिया है। यह कार्तिक वशिष्ठ की प्रतिभा ही थी जिसके बल पर लगातार 3 वर्षों तक अपनी कॉलेज की फुटबॉल टीम की कप्तानी की। 

Biography of Footballer Kartik Vashist | फुटबॉलर कार्तिक वशिष्ठ के जीवन परिचय

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कार्तिक वशिष्ठ की Sport Journey.

हरियाणा से आने वाले Kartik Vashist जब 6 वीं कक्षा में थे, तब उन्हें स्कूल स्टेट फुटबॉल चैंपियनशिप के लिए चुना गया था। उसके बाद उन्होंने फुटबॉल चैंपियनशिप में 14 से अधिक बार भाग लिया था। जैसे- Coca Cola Cup , school State Games , Rural Games, Savodya School Competition. 

इनके अलावा Rural Nationals, senior Division League Jabalpur Madhya Pradesh,Senior State championship,Open football tournaments, Football LEAGUES. इन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया है जैसे कि Helsinki cup Finland, Sam soccer international cup indonesia,Indo -Nepal youth Exchange Program.

IFA7 विश्व कप ग्वाटेमाला, मध्य अमेरिका में भारत का प्रतिनिधित्व किया है, और विश्व के सबसे बड़े 8-ए साइड फुटबॉल टूर्नामेंट, कॉन्टिनेंटल फुटबॉल लीग में Mini Football Indian Team में भारतीय टीम का नेतृत्व किया, जो कि 2018 में रूस के मॉस्को में आयोजित हुआ था।

 

जब National Camp में हुआ पहली बार Selection

कभी कभी जीवन में तकदीर भी हमारी परीक्षा लेती है कि हमारी आंखों में पल रहा सपना कितना मजबूत है। कार्तिक के साथ पहले National Camp Selection में जो कुछ भी हुआ, ठीक वैसा ही किसी और खिलाड़ी के साथ होता तो शायद फुटबॉल से हमेशा के लिए नाता तोड़ देता, पर कार्तिक ने ऐसा नही किया। 

कार्तिक वशिष्ठ के फुटबॉल कैरियर में तब एक नया मोड़ आया जब दसवीं कक्षा में ये School State Games खेलने गए। यही पर इनका Selection National Camp में हुआ। यह Camp हरियाणा के गुड़गांव में स्थित Tau Devilal Stadium में लगा हुआ था। कार्तिक इस Selection से बहुत खुश थे और आगे की तैयारियां वही Camp में करने लगे। 

लेकिन Selection का जब Final Trial हुआ तो उसमें कार्तिक को नही चुना गया, और वो हरियाणा स्टेट के लिए नही खेल पाए। कार्तिक वशिष्ठ इससे बहुत ज्यादा आहत हुए। अपने स्टेट के लिए खेलने का अवसर उनके दरवाजे से दस्तक दे कर जा चुका था। इस पूरी घटना की सबसे दिलचस्प बात यह थी कि ठीक इसी दिन कार्तिक का जन्म दिन था। शायद  नियति कार्तिक के सब्र और  परिश्रम का और इम्तिहान लेना चाहती थी, या फिर बताना चाहती थी कि अब मंजिल दूर नही है बस कुछ कदम और चलना है।  

 

Social Media पर रहते हैं Active.

Kartik Vashist अन्य लोगों की तरह Social Media पर काफी Active रहते हैं। वो Facebook,Twitter instagram और Youtube पर अपनी Videos और Photo Share करते रहते हैं।कार्तिक वशिष्ठ के Fans भी उन्हें काफी Support करते हैं| 

 

Kartik Vashist की Hobbies

कार्तिक वशिष्ठ के दोस्त श्री प्रदीप जो कि हरियाणा पुलिस डिपार्टमेंट में Sub Inspector हैं और हरियाणा पुलिस टीम के Coach भी हैं उन्होंने बताया कि कार्तिक को Trekking करना, यात्रा करना, नए दोस्त बनाना, विभिन्न संस्कृतियों को जानना-समझना बहुत पसंद है। इन सबके अलावा इन्हें ऐसी फिल्म देखने का भी काफी शौक है जो किसी Sport Person की Real Life से प्रेरित हो। जैसे द एम एस धोनी अनटोल्ड स्टोरी, भाग मिल्खा भाग, दंगल, मैरीकॉम। ऐसी फिल्में कार्तिक वशिष्ठ को बहुत प्रेरणा देती हैं, जिंदगी में आगे  बढ़ने के लिए। 

इन्हें घूमने का  बहुत शौक है। ये दुबई, थाईलैंड, मलेशिया सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों की यात्रा कर चुके है, और यह सफर यही पर थमने वाला नही है। यह सूची और भी आगे जाएगी। इसके साथ साथ इन्हें दौड़ना और साइकिल चलाना बहुत पसंद है। वही दोस्तों के साथ खेलना और वक़्त बिताना इन्हें बचपन से ही काफी अच्छा लगता है।  

 

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कार्तिक वशिष्ठ की उपलब्धियां

 कार्तिक वशिष्ठ अपने कैरियर को याद करते हुए 2011 में आयोजित हुए कोका-कोला कप में स्वर्ण पदक जीतने को एक बड़ी उपलब्धि मानते हैं। जीवन की अपनी पहली सफलता की कहानी याद करते हुए कार्तिक बताते हैं कि उन्होंने टीम को जिताने में अहम भूमिका निभाई।  

यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण दिन था क्योंकि इस दिन उन्हें एहसास हुआ था कि अपनी टीम की बड़ी जीत में योगदान देने का क्या महत्व होता है। प्रदेश की लोकल मीडिया इसके बाद जिस तरह से पूरे Event को कवर कर रही थी उसे देखकर कार्तिक वशिष्ठ को इस पल के महत्व का एहसास हुआ। 

भारत के लिए खेलने के लिए 2015 में, उन्हें Indo-Nepal Youth Exchange program का हिस्सा बनने का मौका मिला। बाद में कार्तिक ने Pride Sport FC के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद जुलाई 2016 में Helsinki cup और अगस्त 2016 में Sam  Soccer International Cup कप में उनका प्रतिनिधित्व किया। 

इन्होंने Hero Aiff Santosh Trophy, Senior National Championship  में अपनी राज्य टीम का प्रतिनिधित्व किया जो आज तक उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है।  

इसके साथ ही कार्तिक, भारतीय मिनी फुटबॉल टीम के कोच हैं। कार्तिक ने वर्ष 2019 में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में World Mini-Football World Cup कप में Mini-Football Association Of India बैनर तले भारतीय टीम का प्रबंधन किया है। 2017 में आयोजित IFA7 World Cup GUATEMALA, CENTRAL AMERICA में कप्तान के रूप में इन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। 

साथ ही विश्व के बड़े Football Tournaments में से एक Continental Football League टीम की कप्तानी की थी। इस Tournament का आयोजन रूस के मॉस्को में मई-2018 में किया गया था। कार्तिक वशिष्ठ न सिर्फ एक Football खिलाड़ी है बल्कि साथ में All India Football Federation से मान्यता प्राप्त D-License coach हैं। इनकी यह अभूतपूर्व उपलब्धियां कई युवाओं के लिए खासकर खेल में कैरियर बनाने के लिए बहुत प्रेरणादायी हैं। 

 

कार्तिक वशिष्ठ के जीवन की एक बड़ी ही रोचक कहानी. 

बात तब ही है जब कार्तिक वशिष्ठ चलना सीख चुके थे। उम्र कुछ ज्यादा बड़ी नही थी। उसी दौरान उनके शहर में एक Event हो रहा था, जिसे देखने के लिए वह अपने पापा के साथ गए हुए थे। Event के शुरू होते ही कुछ Hydrozen Balloon आसमान में छोड़े गए, लेकिन किसे पता था भविष्य का एक फुटबॉलर आज पहली बार उन बैलून के लिए दौड़ेगा। 

उन गुब्बारों को देखकर कार्तिक उन्हें पकड़ने के लिए उनके पीछे भागने लगे। यह कार्तिक की पहली दौड़ थी। अब इसे संयोग कहें या कुदरत का इशारा जिसने खुद बता दिया था कि कार्तिक दूर जाती चीज़ों के पीछे भागते हैं। वहाँ पहली बार गुब्बारे में पीछे भागे थे और आज फुटबॉल के पीछे भागने वाले एक स्टार खिलाड़ी हैं। 

 

कार्तिक वशिष्ठ की पहली हवाई यात्रा का रोचक किस्सा. 

किसी भी Sport Person के जीवन का सबसे बड़ा पल वह होता है जब देश की Team में शामिल होकर विदेशी धरती पर खेलने जाता है।कार्तिक वशिष्ठ के जीवन मे पहला International Tour करने का अवसर 2016 में आया, जब गुजरात मे लगे एक कैम्प में उनका चयन Helsinki cup, finland के लिए हो गया। मात्र 20 वर्ष की उम्र में यह अवसर पाना एक बड़ी बात होती है। 

लेकिन कार्तिक इस बात को लेकर चिंतित थे कि उनके पास Passport नही है, ऐसे में उनका इस टूर्नामेंट में जाना Cancel हो सकता था। साथ ही एक मध्यवर्गीय परिवार से होने के चलते उन्हें यह भी समझ नही आ रहा था कि इतना जल्दी अब पासपोर्ट कैसे बनवा पायेंगे। लेकिन एक कहावत बनी है कि होनहार के सामने खुद किस्मत भी झुक जाती है। किसी फिल्म की तरह

उस मुसीबत के वक़्त में कार्तिक की मदद की IPS Yashpal Singha जी ने, जो कि उनके ग्रह निवास के पुलिस सर्विस के प्रमुख थे। उन्होंने मात्र 4 घंटे के अंदर कार्तिक की पहली हवाई उड़ान से संबंधित सभी दिक्कतों को दूर करवाया और उनका Passport बन गया। आखिरकार कार्तिक वशिष्ठ उस टूर्नामेंट के लिए Finland जा सके। 

कार्तिक का यह बचपन का सपना था कि वह कभी हवाई जहाज में बैठे, और उस दिन उनका वह सपना साकार हुआ। कार्तिक वशिष्ठ आज भी पूरी विनम्रता के साथ तहे दिल से IPS Yashpal Singhal का आभार व्यक्त करते हैं। 

 

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कार्तिक वशिष्ठ के कुछ पसंदीदा खिलाड़ी. 

बतौर खिलाड़ी कार्तिक वशिष्ठ देश और दुनियाँ के बाकी खेल और खिलाड़ियों के बारे में भी जानकरी रखते हैं। कार्तिक वशिष्ठ का पहला पसंदीदा खेल फ़ुटबॉल ही है। पुर्तगाली फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो इनके पसंदीदा खिलाड़ी हैं। 

वहीं किसी दूसरे Sport में देखे तो ये भारतीय एथेलीट हिमा दास के काफी प्रभावित हुए हैं। ये दोनों ही खिलाड़ी कार्तिक वशिष्ठ के प्रेरणास्रोत हैं। 

 

बतौर मुख्य अतिथि कई कार्यक्रमों में शामिल हुए

कहते हैं उगते सूर्य को हर कोई नमन करता है। कार्तिक वशिष्ठ भारतीय फुटबॉल की दुनियाँ के उदयमान सूर्य की तरह है। तभी तो उन्हें इतनी कम उम्र में कई कार्यक्रमों में बतौर मुख्य अतिथि बुलाया गया। किसी भी व्यक्ति के लिए किसी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होना एक गौरव की बात होती है। 

कार्तिक वशिष्ठ इस गौरवपूर्ण पल के भी साक्षी रहे, और कही मुख्य खेल स्पर्धाओं में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल रहे हैं।

मुख्य अतिथि के तौर पर इन्हें कई मंचो पर लगातार बुलाकर सम्मानित किए जाने का सिलसिला आज भी जारी है। 

 

Kartik Vashist के जीवन मे जिन्होंने अहम Role निभाया

कार्तिक वशिष्ठ खुद यह मानते हैं कि उनके जीवन को एक दिशा देने में उनके माता पिता के अलावा गुरुजनों का भी अहम योगदान है। आज कार्तिक वशिष्ठ जिस मुकाम पर हैं वहाँ पहुँचना कई लोगों का सपना होता है, लेकिन सफलता इतनी आसान भी नही होती। पुराने दिनों को याद करते हुए श्रीमती सविता कपूर जो कि कार्तिक वशिष्ठ के स्कूल Haryana Police Public School की Principal है, वो कहती हैं कि 

“कार्तिक वशिष्ठ काफी सभ्य पृष्ठभूमि से आते हैं। अपने पढ़ाई के दौरान ये बहुत मेधावी छात्र नही थे लेकिन फुटबॉल मैदान की हरी घास इन्हें अपनी तरफ खिंचती थी। इन्हें इनके परिवार, दोस्त, शिक्षकों से जो मदद मिली है आज उसी का नतीजा है जो वो इस मुकाम पर हैं.”

स्कूल के बाद कॉलेज में भी कार्तिक को Principal Mr. Praveen Bhardwaj से पूरा सहयोग मिला। Mr. Praveen Bhardwaj पुराने दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि-

” कार्तिक एक Middle Class Family में जन्मे थे इस वजह से परिवार अच्छी तरह से जीवन-यापन तो नही कर पा रही थी, लेकिन उन्होंने कार्तिक के सपने को सहारा दिया। उन्होंने कार्तिक को सहारा दिया और आज कार्तिक अपने परिवार के लिए,अपने देश के लिए खेल रहा है। हरियाणा के एक छोटे जगह से आने वाला, स्कूल जाने वाला लड़का आज एक professional footballer बन चुका है। यह सफर अभी थमने वाला नही है क्योंकि कार्तिक वशिष्ठ को अभी काफी लंबा सफर तय करना है।”

आज फुटबॉल भले ही देश मे इतना ज्यादा लोकप्रिय नही है लेकिन कार्तिक वशिष्ठ जैसे फुटबॉल के प्रति दीवानगी रखने वाले खिलाड़ी जब मैदान में होते है न तो वह खेल किसी रोमांचक फ़िल्म की तरह बन जाता है, जिसका 1 सेकंड भी कोई देखने से चूकना नही चाहता। यदि कार्तिक वशिष्ठ की तरह ही कुछ और युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ी इस खेल से जुड़ जाए तो वह दिन दूर नही होगा जब फुटबॉल मैच देखने के लिए भी देश की गलियाँ सुनी हो जाएगी। 

दर्शकों से खचाखच भरे किसी मैदान में कार्तिक नाम की गूंज सुनाई देगी और देश की इतिहास बुक में फुटबॉल के साथ साथ कार्तिक वशिष्ठ का नाम भी स्वर्णिम शब्दों में दर्ज हो जाएगा। 

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