महाभारत का पुराना या प्राचीन नाम क्या था। Mahabharat ka Purana Naam Kya

दोस्तोँ आज हम जानेंगे की महाभारत का पुराना या प्राचीन नाम क्या था। Mahabharat ka purana naam kya है,  जी हाँ जयसहिंता है Mahabharat ka purana naam, जानकर होंगे हैरान ‘जयसहिंता’ जो कि Mahabharat ka purana naam है, हिन्दू धर्म के लोगों का सबसे प्रमुख दार्शनिक काव्य ग्रंथ है। इतिहास के पन्नों को पलटेंगे तो पाएंगे कि इस ग्रंथ का प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में पड़ता है।  यह सवाल में जनरल नॉलेज पूछा जा सकता है|

महाभारत का पुराना या प्राचीन नाम क्या है: जयसहिंता

महाभारत का पुराना नाम “जयसहिंता” था | आप ‘जयसहिंता’ को पौराणिक समय का जीवन के जवाबों की किताब भी कह सकते हैं। व्यक्ति का जीवन उससे कई तरह के प्रश्न पूछता है जिसका जवाब इंसान हर दूसरे इंसान से जानना चाहता है या उस सवाल का जवाब ढूंढता है लेकिन कोई व्यक्ति ‘जयसहिंता’ में दिए सुझावों का इस्तेमाल नहीं करता। अगर वे करते हैं तो वे महान इंसान की श्रेणी में खुद को पा सकते हैं।

महाभारत का पुराना या प्राचीन नाम क्या था

वेद व्यास जी थे इसके रचयिता ‘जयसहिंता’ उर्फ ‘महाभारत’ की रचना लगभग 3100 ईसवीं पहले ऋषि कृष्ण द्वैपायन वेद व्यास जी ने की थी। वेद व्यास जी ने इस काव्य ग्रंथ को पूरा करने में 3 साल का वक्त लिया। महाभारत में इसका उल्लेख भी मिलता है। कहा जाता है कि महाऋषि वेद व्यास जी ने एक गुफा जो बेहद पवित्र माना जाता है, वहाँ तपस्या की जिसमें वह कड़ी ध्यान मुद्रा में बैठकर इस सबसे बड़े साहित्यिक ग्रंथ की रचना मन में ही कर डाली। वेद व्यास जी ने यह पावन रचना अपने पुत्र जिनका नाम शुकदेव था उनसे अध्यन कराया।

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इन नामों से भी मिली प्रसिद्धि

महाभारत का पुराना नाम केवल ‘जयसहिंता‘ से ही नहीं बल्कि कई अलग नामों से भी प्रसिद्धि मिली। हिन्दू धर्म के सबसे बड़े और प्रमुख साहित्यिक ग्रंथ को काव्य ग्रंथ भी कहा जाता है। हिन्दू धर्म मे इस ग्रंथ को पंचम वेद का स्थान प्राप्त है। महाभारत को महाभारत बनने के लिए तीन चरणों में से गुजरना पड़ा। कहने का अर्थ यह है कि वेद व्यास जी ने महाभारत को 3 बार मे पूरा रूप दिया। पहले चरण में यानी मूल रूप में महाभारत में मात्र 8800 श्लोक थे जब इसका नाम ‘जयसहिंता’ रखा गया। यहाँ ‘जयसहिंता’ शब्द का अर्थ है विजय संबंधी ग्रंथ।

दूसरे चरण में इस ग्रंथ में श्लोकों की संख्या 24000 तक पहुंच गई तब इस महान ग्रंथ को ‘भारत’ के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त हुई। तीसरे चरण में वेद व्यास जी ने श्लोकों की संख्या एक लाख के पार कर दी, जिसके बाद इस ग्रंथ का नाम ‘महाभारत’ रखा गया। वर्तमान समय मे महाभारत काव्य ग्रंथ में तकरीबन 1,10,000 श्लोकों को जगह प्राप्त है। इन सभी श्लोक व्यक्ति को जीवन को अलग तरह से देखने का नजरिया देने में सक्षम है।

‘गीता’ है ‘महाभारत’ का छोटा हिस्सा

हिन्दू धर्म में यह सवाल कई बार उठता है कि ‘गीता’ और ‘महाभारत’ में क्या अंतर है। अगर ‘महाभारत’ सबसे लंबा साहित्यिक काव्या ग्रंथ है तो उसे हिन्दू धर्म का धार्मिक ग्रंथ की उपाधि क्यों नहीं मिली। इन दोनों ग्रंथो में मूल रूप से कोई अंतर नहीं बल्कि ‘गीता’ को ‘महाभारत’ का ही हिस्सा कहा जाता है। यह दोनों ग्रंथ एक ही पुराण का नाम है। इन ग्रंथों का असल उपदेश श्री कृष्ण भगवान के जीवनयात्रा के माध्यम से व्यक्ति के जीवन की सब दुविधाओं का जवाब बताना है।

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‘गीता’ और ‘महाभारत’ में केवल यह अंतर है कि जहाँ ‘गीता’ मात्र श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए जीवन से संबंधित जवाब हैं अर्थात श्रीकृष्ण जी महाभारत युद्ध होने से पूर्व अर्जुन को जीवन, म्रत्यु, धर्म, कर्म, आत्मा एवं परमात्मा की सच्ची परिभाषा बताई गई है। वहीं ‘महाभारत’ में श्रीकृष्ण जी की जीवन यात्रा का वर्णन है, उनके बचपन की शरारतें एवं जीवन के हर पड़ाव पर दिए गए कुछ सवाल के जवाब भी मौजूद है। ‘महाभारत’ में कौरवों और पांडवों का भी इतिहास का संक्षेप में वर्णन किया है।

महाभारत: मिलती है यह शिक्षा

‘महाभारत’ ग्रंथ को मात्र एक ग्रंथ मानने की भूल न करें बल्कि यह जीवन को अलग नजरिया देने का उपाय है। यह एक मार्ग है जिसके माध्यम से व्यक्ति स्वयं को शुद्धता प्रदान कर सकता है। इस ग्रंथ को ध्यान से पढ़ेंगे तो पाएंगे कि कई महत्वपूर्ण सवालों का बेहद सरल तरिके से यह किताब जवाब दे देती है। जैसे कि कभी भी व्यक्ति को अपना जीवन बिना प्लानिंग के नहीं जिनी चाहिए अर्थात हर क्षण के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए। दूसरा उपदेश यह मिलता है की अधूरा ज्ञान से खुद को बचाएं, यह कहने का अर्थ यह है कि व्यक्ति को हर क्षेत्र का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए न कि आधे अधूरे ज्ञान से किसी दूसरे व्यक्ति से मतभेद करें इससे रिश्ते में खटास होने की संभावनाएं है। ऐसे ही कई ज्ञान के उपदेश व्यक्ति को यह ग्रंथ पढ़ने पर हासिल होती है।

आपको Mahabharat ka purana naam ‘जयसहिंता’ का ‘महाभारत’ बनने तक का सफर कैसा लगा। अतः मैं आपसे यही कहना चाहूंगा कि हर व्यक्ति को अपने धार्मिक ग्रंथ का ज्ञान अवश्य होना चाहिए ताकि वह अपना जीवन व्यापन खुशी से पूर्ण कर सके।

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आज की पोस्ट के माध्यम से आपने जाना कि महाभारत का पुराना या प्राचीन नाम क्या था। Mahabharat ka purana naam kya है और आपको इस पोस्ट के द्वारा हमने आपको एशिया महाद्वीप में कुल कितने देश हैं? How many countries are there in Asia continent? के बारे में भी बताया। आशा करते है की आपने इस पोस्ट के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की होगी।

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