मस्तराम की कहानी, Mastram ki Hindi story

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मस्तराम की कहानी, Mastram ki Hindi story

मस्तराम इस कहानी में बहुत आलसी व्यक्ति दिखाया गया है हमेशा अपनी मस्ती में ही रहता है।

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दोस्तों यह कहानी है| एक व्यक्ति जिसका नाम मस्तराम है| मस्तराम इस कहानी में एक बहुत ही मस्त आदमी है| जो की इतना अलसी है| जो की अपने और अपने धंधे के काम भी दूसरे आदमियों से करवाता है

मस्तराम की एक खेत और दूध दुकान होती है| इसमें का दूध का व्यवसाय करता है| दोस्तों एक बहुत बड़ी संपत्ति का मालिक होते हुए भी एक बहुत ही अच्छी लगती है| मस्त राम एक नौकर और दूध वाली दुकान पर नौकर रखा हुआ था क्योंकि मस्तराम बहुत आलसी आदमी है| इसलिए अपना सारा काम अपने नौकरों के द्वारा करवाता था बट अभी बहुत ज्यादा थे और बोलते थे कीमत राम को कुछ पता नहीं चलेगा व व्यवसाय में उसके साथ में लोहारी करते थे लेकिन तुम तो आप किसी के साथ में कितनी भी धोखाधड़ी कर ली सच सामने आ ही जाता है|

दोस्तों काफी समय हो गया लगभग 2 साल के बाद में मस्त नाम का व्यवसाय कम होने लगा दूध की बिक्री कम हो गई खेत की फसलें भी बेकार हूं मैं तुम वह तुम को एक दिन यह एहसास हुआ कि उसका व्यवसाय उसके कमजोरी की वजह से सब चौपट हो गया है|

दोस्तों लेकिन उस वक्त उनके पिता ने उसे बुलाया और अपने पास बिठाया दोस्तों उसके पिता ने उसको समझाया कविता अगर अपना धंधा दूसरों को दो तो वह हमेशा तुम्हारे धंधे पर ध्यान नहीं दे पाएंगे बल्कि अपना फायदा करने की सोचेंगे

क्योंकि आजकल हर आदमी अपना फायदा करना चाहता है| तब्बू से लगा कि उसके पिता उसकी भलाई के लिए सही कह रहे हैं तो उस दिन दोनों को को बुलाया और कहा की की तुम अपना फायदा के लिए मेरा नुकसान कर रहे हो घर गया और उसने अपने सभी लोगों को निकाल दिया दोस्तों को बुलाया और उसके बाद अपने पर नियमित रूप से सुबह और शाम ध्यान देता था सुबह वंतूर की दुकान पर जाता था शाम को अपनी खेती करता था इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है|

हमें मस्तराम की तरह अपने बहुत ज्यादा इधर उधर की बातों में ध्यान नहीं लगाना चाहिए अपने व्यवसाय को खुद देखना चाहिए अपने लक्ष्य को केंद्रित करते हुए अपने काम में मन लगाना चाहिए नहीं तो मस्तराम की तरह हमेशा कामचोरी आसन के लिए जानआ जायेगा।

तब मस्तराम को यह समझ में आ गया था की जिंदगी युहीं नहीं चल जाती है| उसक लिए खुद मेहनत करनी पड़ती है| दूसरे पे भरोसा कर्क हम हमेशा अपना धंधा नहीं चला सकते हैं।ककी उस टाइम वह अपने नुकर पर भरोसा करके उधर फ्री घूमता था मस्तराम को लग गया था उसका नुकर उसक साथ बेमानी कर रहा है

तब से मस्तराम को अकक्ल आ गयी और वह अपना कार्यभार खुद ही देखने लगा!

मस्तराम हमेशा मस्ती में ही रहता था और कभी भी अपने वयवसाय पे ध्यान नहीं दे पाता था दोस्तों मस्तराम की कहानी (Mastram Storyin Hindi) अगर पसंद आयी तो आगे शेयर कर दीजिये|